Edited By Kuldeep, Updated: 21 Jan, 2026 07:22 PM
लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सकारात्मक प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। केंद्र सरकार से हिमाचल को 2247.24 करोड़ रुपए की फाइनल मंजूरी दी है।
शिमला (भूपिन्द्र): लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि सकारात्मक प्रयासों के सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। केंद्र सरकार से हिमाचल को 2247.24 करोड़ रुपए की फाइनल मंजूरी दी है। इसकी सूचना केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से फोन के माध्यम से आई है। इससे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) का चौथा चरण विधिवत रूप से शुरू हो जाएगा। इसके तहत प्रदेश में 1538 किलोमीटर लंबी 294 सड़कों का निर्माण किया जाएगा, जिन पर कुल 2247 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इनमें से 2,019.70 करोड़ ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा वहन किए जाएंगे, जबकि राज्य सरकार का अंश 227.54 करोड़ रुपए होगा। इसकी प्रति किलोमीटर औसत लागत 146.11 लाख रुपए निर्धारित की गई है
। यह बात उन्होंने बुधवार को शिमला में पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि 8 जनवरी को दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर डीपीआर शीघ्र स्वीकृत करने का आग्रह किया गया था, जिस पर आज स्वीकृति मिल गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र से अधिकाधिक संसाधन लाकर प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में सड़क संपर्क मजबूत किया जाएगा, ताकि विकास की गति समान रूप से आगे बढ़े। मंत्री ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. वीरभद्र सिंह से सीखा है कि प्रदेश के विकास के लिए केंद्र का बर्धहस्त होना आवश्यकता है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को अधिक से अधिक डीपीआर केंद्र को भेजने के लिए कहा गया है।
किस जिला को कितनी राशि मंजूर
पी.एम.जी.एस.वाई.-4 के तहत जिला बिलासपुर के लिए 29 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। इसी तरह चम्बा को 55, हमीरपुर को 10, कांगड़ा को 50, किन्नौर को 90, कुल्लू को 55, लाहौल स्पीति को 600, मंडी को 120, शिमला को 66, सिरमौर को 80, सोलन को 120 व ऊना जिला को 80 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। उन्होंने कहा कि 4 सड़कें बिलासपुर, 65 चम्बा, 2 हमीरपुर, 12 कांगड़ा, 8 किन्नौर, 65 कुल्लू, 2 लाहौल-स्पीति, 23 मंडी, 97 शिमला, 11 सिरमौर, 3 सोलन तथा 2 सड़कें ऊना जिले के लिए स्वीकृत की गई हैं।
जलवायु संकट भी बन रहा आपदा
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रदेश इस समय एक नई तरह की आपदा से जूझ रहा है। पर्याप्त बारिश नहीं हो रही, पहाड़ों में बर्फबारी कम हुई है, जिससे चिलिंग आवर्स प्रभावित हो रहे हैं। इसका सीधा असर सेब उत्पादन और अन्य कृषि फसलों पर पड़ेगा। उन्होंने चेताया कि यदि यह स्थिति बनी रही तो भविष्य में सेब का आकार, रंग और उत्पादन प्रभावित होगा। जल स्रोतों के सूखने से भी चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए गंभीर मंथन और दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है।
नई तकनीक से बनेंगी सड़कें
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि सड़कों के निर्माण में सीजीएमए तकनीक को अपनाया जा रहा है, जिससे सड़कों को 10 साल की गारंटी मिलती है। केंद्रीय मंत्रालय से आग्रह किया जाएगा कि अधिक नमी और छायादार क्षेत्रों में इस तकनीक से सड़क निर्माण करने की मंजूरी दी जाए। उन्होंने कहा कि अवैध डंपिंग व खनन पर सख्ती की जाएगी। साथ ही शिमला-रामपुर फोरलेन में सुरंग निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी।
अर्बन चैलेंज फंड के तहत 650 करोड़ के प्रोजैक्ट केंद्र को भेजे
उन्होंने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड के तहत केंद्र को 650 करोड़ रुपए का प्रोजैक्ट भेजा गया है। इससे शिमला सब्जी मंडी का रिडिवैल्पमैंट तथा हमीरपुर मुख्य बाजार का पुनर्विकास किया जाएगा। साथ ही नई टाऊनशिप और रिवर फ्रंट परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर केंद्र को भेजी जाएगी।
जबरन नहीं होगा किसी की भूमि का अधिग्रहण
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जाठियादेवी में 260 बीघा भूमि लैंड पूलिंग से हिमुडा को हस्तांतरित हो चुकी है। अगले चरण में 1200 बीघा भूमि जोड़ने की योजना है, लेकिन किसी की भी निजी भूमि का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। किसानों व बागवानों के हितों की कीमत पर विकास नहीं होगा।