Shimla: किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य को बचाने का करें सांझा प्रयास : अनुराग ठाकुर

Edited By Kuldeep, Updated: 01 Mar, 2026 06:35 PM

shimla kinnaur culture preservation efforts

सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि किन्नौर की संस्कृति, इतिहास, वेशभूषा पूरी दुनिया में सराही जाती है। यदि हिमाचल देवभूमि है तो किनौर देवभूमि हिमाचल का मणिमुकुट है।

शिमला (ब्यूरो): सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि किन्नौर की संस्कृति, इतिहास, वेशभूषा पूरी दुनिया में सराही जाती है। यदि हिमाचल देवभूमि है तो किनौर देवभूमि हिमाचल का मणिमुकुट है। आपसी समन्वय को बढ़ाने का तोशिम नाम से यह कार्यक्रम पिछले 4 दशकों से अधिक समय से चल रहा है। किन्नौर में सिर्फ सेब ही नहीं उगते हैं, किन्नौर में भारत की सबसे पुरानी और समृद्ध सभ्यता और संस्कृति भी पलती है। हम सभी को देवभूमि हिमाचल का निवासी होने का गौरव प्राप्त है, लेकिन एक हिमाचली के साथ किन्नौरी होना अपने आप में गर्व का विषय है। यह बात उन्होंने दिल्ली में दिल्ली-किन्नौर स्टूडैंट्स एसोसिएशन के वार्षिक कार्यक्रम तोशिम में बतौर मुख्यातिथि संबोधित करते हुए कही। उन्होंने किन्नौर की संस्कृति, बोली व साहित्य पर अपने विचार रख कर इसे सहेजने व प्रचारित-प्रसारित करने के सांझा प्रयासों पर जोर दिया।

ठाकुर ने कहा कि दिल्ली-किन्नौर स्टूडैंट्स एसोसिएशन भाषा एवं संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ किन्नौर के युवाओं का सशक्तिकरण भी कर रहा है। ऐसे में हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने इन युवाओं के प्रयासों को अपना बल प्रदान करें। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के 75 गावों को वाईब्रैंट विलेज प्रोग्राम योजना में शामिल किया गया था, जिसमें से 55 गांव किन्नौर से हैं। इस योजना के तहत नाको और लिओ जैसे गांवों में टूरिस्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि किन्नौर का ओरल लिटरेचर व फोक लिटरेचर काफी समृद्ध है, जिस पर काम करने की जरूरत है।

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