Himachal: रिटायर्ड फौजी वीरेंद्र ने खेती को बनाया लाखों की कमाई का जरिया

Edited By Jyoti M, Updated: 11 Jan, 2026 04:50 PM

himachal retired soldiers are producing vegetables worth millions

कृषि और बागवानी के साथ-साथ पशुपालन एवं इनसे संबंधित अन्य कार्यों को प्रोत्साहित करके किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयासों के जमीनी स्तर पर अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं।

हमीरपुर। कृषि और बागवानी के साथ-साथ पशुपालन एवं इनसे संबंधित अन्य कार्यों को प्रोत्साहित करके किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण आर्थिकी को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयासों के जमीनी स्तर पर अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी की एक झलक देखने को मिल रही है भोरंज उपमंडल के पट्टा क्षेत्र के गांव कोटलू में।

ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिकी मजबूत करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गई विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ उठाकर गांव कोटलू के सेवानिवृत्त सैनिक वीरेंद्र सिंह अब हर सीजन में 4 से 5 लाख रुपये तक की सब्जियां बेच रहे हैं और अब उन्होंने मशरूम उत्पादन, पोल्ट्री तथा पशुपालन में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है।

थल सेना से रिटायर होने के बाद वीरेंद्र सिंह अपनी पुश्तैनी जमीन पर पारंपरिक फसलों के बजाय नकदी फसलों की खेती करना चाहते थे, ताकि वे घर में ही अच्छी आय हासिल कर सकें। शुरुआती दौर में उन्हें कई दिक्कतें आईं। सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई व्यवस्था और खेतों की जुताई की थी। इसी दौरान उन्हें कृषि और बागवानी विभाग की विभिन्न सब्सिडी योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने खेतों की जुताई के लिए पॉवर टिल्लर ट्रैक्टर और सिंचाई हेतु स्प्रिंकर एवं ड्रिप सिंचाई की उपकरणों के लिए आवेदन किया।

वीरेंद्र सिंह ने लगभग 58 हजार रुपये का पॉवर टिल्लर ट्रैक्टर खरीदा, जिस पर उन्हें 50 प्रतिशत यानि 29 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इसी प्रकार, उन्होंने अपने खेतों में स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई के उपकरण स्थापित किए। इन उपकरणों पर उन्हें 80 प्रतिशत यानि 40 हजार रुपये की सब्सिडी मिली।

प्रदेश सरकार की मदद से जुताई और सिंचाई का प्रबंध होने के बाद वीरेंद्र सिंह ने सब्जियों की खेती शुरू की। अब वह अलग-अलग सीजन में गोभी, मटर, टमाटर, लहसुन, प्याज और अन्य सब्जियां लगाकर अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं। आजकल उनके लगभग 3 कनाल के खेत में मटर की फसल खूब लहलहा रही है और उन्हें उम्मीद है कि इस खेत से ही उन्हें 10-12 क्विंटल पैदावार हो जाएगी। पिछले सीजन में उन्होंने लगभग 25 क्विंटल फूल गोभी भी पैदा की, जिसे हमीरपुर की सब्जी मंडी में ही 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक दाम मिले।

वीरेंद्र सिंह ने बताया कि वह साल में 4 से 5 लाख रुपये तक की सब्जी बेच रहे हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेश सरकार की सराहना करते हुए वीरेंद्र सिंह का कहना है कि अब वह अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए खेती में विविधता ला रहे हैं। इसमें उन्होंने मुर्गी पालन और बकरी पालन को भी जोड़ा है तथा तीन महीने पहले ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) के माध्यम से मशरूम की खेती का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद घर में ही मशरूम का उत्पादन भी शुरू किया है। उन्होंने 150 बैगों में मशरूम की खेती शुरू की है और इसकी पहली फसल ही 11 हजार रुपये में बिकी।

वीरेंद्र सिंह का कहना है कि किसान-बागवान सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर नकदी फसलों की खेती शुरू करके काफी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। गांव कोटलू के भूतपूर्व सैनिक के ये प्रयास अन्य लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए काफी प्रेरणादायक हैं। 

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