Edited By Jyoti M, Updated: 03 Mar, 2026 11:17 AM

होली का त्योहार खुशियां लेकर आता है, लेकिन केमिकल युक्त रंग इस आनंद को फीका कर सकते हैं। शिमला स्थित IGMC के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जीके वर्मा ने लोगों को सचेत किया है कि होली खेलने के लिए केवल प्राकृतिक और हर्बल रंगों का ही चुनाव करें।
हिमाचल डेस्क। होली का त्योहार खुशियां लेकर आता है, लेकिन केमिकल युक्त रंग इस आनंद को फीका कर सकते हैं। शिमला स्थित IGMC के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. जीके वर्मा ने लोगों को सचेत किया है कि होली खेलने के लिए केवल प्राकृतिक और हर्बल रंगों का ही चुनाव करें।
केमिकल रंगों के दुष्प्रभाव
बाजार में मिलने वाले चमकदार और सिंथेटिक रंगों में भारी मात्रा में रसायन होते हैं, जिनसे निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं। जैसे कि एक्जिमा, मुंहासे और गंभीर खुजली। लंबे समय तक सिंथेटिक रंगों का संपर्क कैंसर जैसी घातक बीमारियों का कारण बन सकता है। ये रंग आंखों की रोशनी और कानों के लिए भी नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। अस्थमा या छाती की एलर्जी से जूझ रहे मरीजों के लिए रंगों का डस्ट खतरनाक है; उन्हें मास्क पहनना चाहिए।
सुरक्षित होली के लिए जरूरी टिप्स
त्वचा पर नारियल तेल, मॉइस्चराइजर या क्रीम की अच्छी परत लगाएं। बालों में तेल लगाकर उन्हें सुरक्षित रखें ताकि रंग अंदर तक न जाए।
रंगों को छुड़ाने के लिए केरोसिन या अन्य पेट्रोलियम पदार्थों का प्रयोग बिल्कुल न करें।
चेहरे को साफ करने के लिए गुनगुने पानी और माइल्ड (Moisturizing) साबुन का इस्तेमाल करें।
बार-बार चेहरा धोने से त्वचा रूखी हो सकती है, इसलिए कोमलता से रंग साफ करें।
यदि रंग खेलने के बाद त्वचा पर जलन या आंखों में तकलीफ महसूस हो, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। लापरवाही भारी पड़ सकती है।