Himachal: महिलाओं में अब बढ़ रहा है यह कैंसर का अधिक खतरा, जानें क्या हैं लक्षण ?

Edited By Jyoti M, Updated: 24 Feb, 2026 04:27 PM

women in himachal are at higher risk of cervical cancer

देवभूमि हिमाचल में महिलाओं का स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती के मुहाने पर खड़ा है। आईजीएमसी (IGMC) शिमला से आए हालिया आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की मध्यम आयु वर्ग की महिलाएं (35 से 55 वर्ष) एक ऐसी घातक बीमारी की गिरफ्त में आ रही हैं, जिसे समय रहते पहचाना...

हिमाचल डेस्क। देवभूमि हिमाचल में महिलाओं का स्वास्थ्य एक गंभीर चुनौती के मुहाने पर खड़ा है। आईजीएमसी (IGMC) शिमला से आए हालिया आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश की मध्यम आयु वर्ग की महिलाएं (35 से 55 वर्ष) एक ऐसी घातक बीमारी की गिरफ्त में आ रही हैं, जिसे समय रहते पहचाना जाए तो मात दी जा सकती है। हम बात कर रहे हैं सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) की, जो प्रदेश में ब्रेस्ट कैंसर के बाद महिलाओं के लिए दूसरा सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है।

विशेष रूप से चंबा और सिरमौर जिलों में इसके मामलों में तेजी देखी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि प्रदेश सरकार अब इसके खिलाफ 'युद्ध स्तर' पर टीकाकरण अभियान छेड़ने की तैयारी में है।

आईजीएमसी के आंकड़े: एक अलार्मिंग स्थिति

बीते 5 वर्षों (2020-2025) में अकेले आईजीएमसी शिमला में 1127 महिलाओं में इस कैंसर की पुष्टि हुई है। हर साल यहाँ लगभग 3000 से ज्यादा कैंसर रोगी आते हैं, जिनमें से करीब 200 महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित पाई जाती हैं।

रिकवरी की संभावना: देरी यानी बढ़ता जोखिम

शुरुआती स्टेज: पूर्णतः उपचार संभव।

दूसरी स्टेज: ठीक होने की उम्मीद 82% से 90%।

तीसरी स्टेज: संभावना घटकर 55% रह जाती है।

चौथी स्टेज: जीवन बचने की उम्मीद मात्र 10% तक सिमट जाती है।

क्यों बढ़ रहा है संक्रमण? (मुख्य कारण और जोखिम)
डॉक्टरों के अनुसार, इस कैंसर का सबसे बड़ा विलेन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। इसके फैलने और घातक होने के पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण हैं। 

असुरक्षित शारीरिक संबंध और कम उम्र में विवाह। बार-बार गर्भधारण करना। नियमित स्वास्थ्य जांच (पैप स्मीयर टेस्ट) के प्रति लापरवाही। शुरुआती लक्षणों (जैसे असामान्य ब्लीडिंग या गंदा पानी आना) को नजरअंदाज करना।

'सुरक्षा चक्र': 29 मार्च से महा-अभियान की शुरुआत

हिमाचल सरकार इस जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए एक विशेष रणनीति पर काम कर रही है। मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने स्वास्थ्य विभाग के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर 'विशेष टीकाकरण अभियान' की रूपरेखा तैयार की है।

डोर-टू-डोर सर्वे: 1 मार्च से आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र किशोरियों की पहचान करेंगी। 29 मार्च से पूरे प्रदेश में वैक्सिनेशन कैंप लगाए जाएंगे।आईजीएमसी के रेडियोथेरेपी विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष गुप्ता के अनुसार, एचपीवी टीका न केवल सर्वाइकल कैंसर बल्कि मलाशय और गले (ओरोफैरिंजियल) के कैंसर के खतरे को भी 85% तक कम कर देता है।

शरीर के संकेतों को न करें अनसुना

कैंसर बढ़ने पर कमर में दर्द, पैरों में सूजन और अत्यधिक थकान महसूस होती है। लेकिन शुरुआती संकेतों पर गौर करना जीवन बचा सकता है। पीरियड्स के बीच में या यौन संबंध के बाद ब्लीडिंग होना। योनि से दुर्गंधयुक्त स्राव होना। पेड़ू (पेट के निचले हिस्से) में लगातार दर्द।

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