Edited By Jyoti M, Updated: 27 Feb, 2026 01:24 PM

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित IGMC अस्पताल अब चिकित्सा तकनीक के मामले में देश के चुनिंदा संस्थानों की कतार में खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को 'हाई-टेक' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संस्थान को...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित IGMC अस्पताल अब चिकित्सा तकनीक के मामले में देश के चुनिंदा संस्थानों की कतार में खड़ा हो गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को 'हाई-टेक' बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने संस्थान को तीन अत्याधुनिक टेस्ला एमआरआई मशीनों की सौगात दी। यह कदम न केवल मरीजों के इलाज की गुणवत्ता सुधारेगा, बल्कि पहाड़ के लोगों को बेहतर इलाज के लिए बाहरी राज्यों की दौड़ लगाने से भी निजात दिलाएगा।
पुरानी तकनीक से छुटकारा, जांच में आएगी सटीकता
आईजीएमसी में अब तक करीब दो दशकों (19 साल) पुरानी 1.5 टेस्ला मशीन के भरोसे एमआरआई स्कैन किए जा रहे थे। पुरानी तकनीक के कारण न केवल रिपोर्ट आने में देरी होती थी, बल्कि मरीजों को महीनों का इंतजार करना पड़ता था।
नई मशीनों के आने से क्या बदलेगा?
हाई-रेजोल्यूशन तकनीक से शरीर के आंतरिक अंगों की तस्वीरें बेहद साफ आएंगी, जिससे डॉक्टर बीमारी की जड़ तक आसानी से पहुँच सकेंगे। वेटिंग लिस्ट में भारी कमी आएगी और मरीजों को तत्काल जांच की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने संकल्प दोहराया है कि एक साल के भीतर राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को इसी तरह की आधुनिकतम तकनीक से लैस कर दिया जाएगा।
पिछली सरकार पर तीखा हमला
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कड़े सवाल उठाए। उन्होंने विपक्ष को 'हिमाचल विरोधी' करार देते हुए कहा कि केंद्र से भारी-भरकम बजट (54 हजार करोड़ का आरडीजी और 16 हजार करोड़ का जीएसटी मुआवजा) मिलने के बावजूद पिछली सरकार ने प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को सुधारने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पर तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान सरकार विजन के साथ काम कर रही है ताकि हिमाचल का पैसा और मरीज दोनों प्रदेश के भीतर ही सुरक्षित रहें।
भविष्य का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता राज्य में 'हाई-एंड मेडिकल इकोसिस्टम' तैयार करना है। अगले 12 महीनों में प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों की सूरत बदलने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें आधुनिक मशीनों के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी शामिल है।