Himachal: पिता को खोया... 13 साल की उम्र में घर छोड़ा, जानिए रेणुका ठाकुर की संघर्ष की कहानी

Edited By Jyoti M, Updated: 04 Nov, 2025 10:02 AM

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हिमाचल प्रदेश के छोटे से गाँव से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान तक का सफ़र तय करने वाली तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर की कहानी किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यह कहानी है जुनून, त्याग और अटूट समर्थन की, जिसने एक साधारण लड़की को देश का गौरव बना...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के छोटे से गाँव से निकलकर अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान तक का सफ़र तय करने वाली तेज गेंदबाज रेणुका ठाकुर की कहानी किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। यह कहानी है जुनून, त्याग और अटूट समर्थन की, जिसने एक साधारण लड़की को देश का गौरव बना दिया।

बचपन का अँधेरा और माँ का संघर्ष

जब रेणुका महज़ दो साल की थीं, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया। पिता स्व. केहर सिंह ठाकुर, जो खुद क्रिकेट के बड़े प्रशंसक (खासकर विनोद कांबली के फैन) थे, अपने बच्चे को क्रिकेट में आगे बढ़ते देखने का सपना देखते थे, पर उनका यह सपना अधूरा रह गया।

इस मुश्किल समय में, रेणुका की माँ, सुनीता ठाकुर, ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने परिवार पालने के लिए वर्षों तक जल शक्ति विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में काम किया और बच्चों को पाला। गरीबी और अभाव के बीच भी रेणुका का क्रिकेट के प्रति प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वह अक्सर गाँव के मैदान में लड़कों के साथ कपड़े की गेंद और लकड़ी के बल्ले से खेला करती थीं।

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एक मौका, जिसने बदल दी क़िस्मत

रेणुका की प्रतिभा को पहली बार उनके चाचा भूपिंद्र ठाकुर ने पहचाना। एक शाम जब वह गाँव के मैदान में खेल रही थीं, तब कॉलेज में प्राध्यापक (प्रोफेसर) तैनात उनके चाचा की नज़र उन पर पड़ी। पहले तो उन्हें पता नहीं था कि यह बच्ची कौन है, लेकिन जब उन्होंने रेणुका को गेंदबाज़ी करने को कहा, तो उनकी तेज और सधी हुई गति देखकर वह चौंक गए।

परिचय होने पर जब उन्हें पता चला कि वह उनके दिवंगत भाई केहर सिंह की बेटी हैं, तो उन्होंने तुरंत रेणुका के पिता का सपना पूरा करने का बीड़ा उठाया। उसी दिन से उन्होंने 13 साल की रेणुका को धर्मशाला क्रिकेट अकादमी भेजने की पहल की।

कामयाबी की पिच पर शानदार इनिंग

धर्मशाला अकादमी में प्रवेश के बाद, रेणुका ने 2019 से कोच के मार्गदर्शन में क्रिकेट की बारीकियां सीखना शुरू किया और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

उनकी मेहनत तब रंग लाई जब वह बीसीसीआई के 2019 महिला एक दिवसीय टूर्नामेंट में 23 विकेट लेकर सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाली गेंदबाज़ बनीं। इस शानदार प्रदर्शन ने उनके लिए टीम इंडिया के दरवाज़े खोल दिए। आख़िरकार, 7 अक्टूबर 2021 को उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने का मौक़ा मिला।

रेणुका ने टीम इंडिया के अलावा, इंडिया वुमन ग्रीन, इंडिया वुमन बोर्ड प्रेजिडेंट और इंडिया बी वुमन का भी प्रतिनिधित्व किया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धूम

राष्ट्रमंडल खेलों में रेणुका का प्रदर्शन यादगार रहा, जहाँ उन्होंने पाँच मैचों में 11 विकेट चटकाए। उनके इस बेहतरीन खेल के लिए आईसीसी ने उन्हें अपनी वनडे और टी-20 दोनों टीमों में जगह दी और साथ ही साल 2022 की उभरती खिलाड़ी का प्रतिष्ठित पुरस्कार भी दिया।

हाल ही में, उन्हें पहले महिला आईपीएल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने 1.40 करोड़ में खरीदकर अपनी टीम का हिस्सा बनाया।

आज, रेणुका ने अपने खेल से न केवल अपने गाँव और रोहड़ू का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उनका सफर बताता है कि सच्ची लगन और कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

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