Himachal: कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर अब हादसे का कारण नहीं बनेंगे बेसहारा पशु, NHAI ने बनाया देश का पहला हाईटैक 'गोकुल धाम'

Edited By Vijay, Updated: 04 Feb, 2026 01:13 PM

hightech gokul dham

हिमाचल प्रदेश के कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन पर सफर अब और भी सुरक्षित होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश के अपने तरह के पहले ‘गोकुल धाम’ का निर्माण...

मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश के कीरतपुर-नेरचौक-मनाली फोरलेन पर सफर अब और भी सुरक्षित होने जा रहा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश के अपने तरह के पहले ‘गोकुल धाम’ का निर्माण किया है। बिलासपुर जिले में टीहरा टनल के पास बना यह धाम केवल एक गौशाला नहीं, बल्कि बेसहारा पशुओं के लिए एक आधुनिक कल्याण केंद्र है। एनएचएआई ने निर्माण कंपनी गाबर के साथ मिलकर इस प्रोजैक्ट को अंजाम दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नैशनल हाईवे पर बेसहारा पशुओं के कारण होने वाले सड़क हादसों पर लगाम लगाना और बेजुबानों को सुरक्षित छत मुहैया कराना है।

हादसों को रोकने के लिए अनोखी पहल
चंडीगढ़-मनाली नैशनल हाईवे पर अक्सर बेसहारा पशु दुर्घटना का कारण बनते हैं। इसी समस्या को देखते हुए एनएचएआई और गाबर कंपनी के बीच एक एमओयू साइन किया गया, जिसके तहत टनल के समीप इस सुरक्षित क्षेत्र को विकसित किया गया है। इसके अलावा, सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए हाईवे पर घूमने वाले अन्य बेसहारा पशुओं के गले में रेडियम बेल्ट और सींगों पर रेडियम टेप लगाई जाएगी, ताकि रात के अंधेरे में भी वाहन चालकों को वे दूर से नजर आ सकें।

हाईटैक सुविधाओं से लैस है 'गोकुल धाम'
यह नवनिर्मित गोकुल धाम आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यहां एक साथ 100 से अधिक पशुओं को रखने की समुचित व्यवस्था है। परिसर के भीतर ही एक अत्याधुनिक डिस्पेंसरी बनाई गई है। पशुओं की देखभाल के लिए 24 घंटे डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ तैनात रहेंगे।  किसी भी दुर्घटना या आपात स्थिति में पशुओं को रैस्क्यू करने के लिए एंबुलैंस की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है।

दूसरे गोकुल धाम की तलाश शुरू, देश भर में लागू होगा मॉडल
टीहरा टनल के पास पहले गोकुल धाम की सफलता को देखते हुए एनएचएआई ने अब प्रदेश में दूसरे गोकुल धाम के निर्माण की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके लिए उपयुक्त जमीन की तलाश जारी है। वहीं, हिमाचल के इस अनूठे मॉडल की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। अन्य राज्य भी हाईवे सुरक्षा और पशु संरक्षण के इस समन्वित प्रयास से प्रभावित होकर अपने यहां इसी तर्ज पर आश्रय स्थल बनाने की योजना बना रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
एनएचएआई के परियोजना निदेशक वरुण चारी ने बताया कि एनएचएआई केवल सड़कें ही नहीं बनाता, बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझता है। गाबर कंपनी के सहयोग से बना यह गोकुल धाम बेसहारा पशुओं के संरक्षण में मील का पत्थर साबित होगा। यह मॉडल भविष्य में अन्य हाईवे प्रोजैक्ट्स के लिए भी प्रेरणा बनेगा।

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