Edited By Vijay, Updated: 31 Jan, 2026 12:03 PM

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कल से एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। अगर आपका कोई काम पंचायत प्रधान या उपप्रधान के स्तर पर रुका है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है।
शिमला (संतोष): हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कल से एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव होने जा रहा है। अगर आपका कोई काम पंचायत प्रधान या उपप्रधान के स्तर पर रुका है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। प्रदेश की 3577 पंचायतों में चुनी हुई सरकार का कार्यकाल आज समाप्त हो रहा है। 1 फरवरी से गांवों की राजनीति के केंद्र रहे इन पदों पर सन्नाटा छा जाएगा। जिन दरवाजों पर फरियादियों की कतार लगती थी, वहां अब निर्वाचित प्रतिनिधियों का अधिकार नहीं रहेगा।
1 फरवरी से प्रधान की मोहर-हस्ताक्षर अमान्य
आम जनता को यह जानना जरूरी है कि हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम की धारा 140 (3) के तहत 5 साल का कार्यकाल पूरा होते ही 1 फरवरी से वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों की वैधानिक शक्तियां स्वतः समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद प्रधान की मोहर या हस्ताक्षर किसी भी सरकारी दस्तावेज पर मान्य नहीं होंगे। इसलिए 1 फरवरी के बाद ग्रामीण जनता को अपने कार्यों के लिए प्रधान के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना होगा।
अब कौन चलाएगा गांव की सरकार?
प्रधानों की शक्तियां समाप्त होने के बाद 1 फरवरी से पंचायतों का कामकाज कैसे चलेगा, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। नियमों के मुताबिक पंचायत का कार्यभार अब या तो तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपा जाएगा या फिर पंचायत सचिव के हाथों में शक्तियां दी जाएंगी। पंचायतीराज विभाग ने इस संबंध में फाइल सरकार को भेज दी है। अब सरकार के आदेशानुसार ही लोकतंत्र की इस सबसे निचली इकाई का संचालन होगा।
प्रदेश के इतिहास में बड़ा बदलाव
हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज एक्ट 1994 (73वें संवैधानिक संशोधन के तहत) लागू होने के बाद यह एक बड़ी घटना है जब एक साथ पूरे प्रदेश की 3577 पंचायतों की कमान निर्वाचित प्रतिनिधियों से छिनकर अधिकारियों या कमेटियों के पास जाएगी। इससे पहले कोविड काल में लाहौल-स्पीति और पांगी में चुनाव टलने पर वहां 3 सदस्यीय कमेटी से काम चलाया गया था, लेकिन अब यह स्थिति पूरे प्रदेश में बनने जा रही है।