भोरंज की इकलौती महिला BDO, पहले प्रयास में दी थी पिता के सपने को उड़ान

Edited By Ekta, Updated: 02 Aug, 2018 03:39 PM

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हमीरपुर के जिला मुख्यालय में उच्च स्तर पर तैनात अधिकारियों में दबदबा महिला अधिकारियों का ही है। हमीरपुर उपमंडल के खंड विकास कार्यालय की बात की जाए तो वहां पर खंड विकास अधिकारी के पद पर भी एक महिला ही तैनात है। जिला में तैनात खंड विकास अधिकारियों में...

हमीरपुर (अंकिता): हमीरपुर के जिला मुख्यालय में उच्च स्तर पर तैनात अधिकारियों में दबदबा महिला अधिकारियों का ही है। हमीरपुर उपमंडल के खंड विकास कार्यालय की बात की जाए तो वहां पर खंड विकास अधिकारी के पद पर भी एक महिला ही तैनात है। जिला में तैनात खंड विकास अधिकारियों में केवल अस्मिता ठाकुर ही इकलौती महिला बी.डी.ओ. हैं। सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर एक अच्छे पद पर पहुंचकर वह अपने क्षेत्र के लोगों के लिए एक उदाहरण बनकर उभरी हैं। अपने काम के प्रति निष्ठावान व ईमानदारी के लिए जानी जाने वाली अस्मिता ठाकुर उतनी ही प्रतिभावान हैं। अपने पिता के सपने व दिखाए गए रास्ते पर चलकर वह आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। बी.डी.ओ. अस्मिता ठाकुर बताती हैं कि ग्रैजुएशन तक उन्होंने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं था लेकिन एक बार पिता ने बातों ही बातों में अलाइड की परीक्षा देने को कहा तो उसने उनका आदेश मान लिया और तैयारी शुरू कर दी। 


खड्ड में डूबने से बची अस्मिता का हौसला नहीं हुआ कम
अस्मिता ठाकुर भोरंज तहसील की डाडू पंचायत से संबंध रखती हैं। उन्होंने बताया कि उनके शिक्षा ग्रहण करने के समय यातायात की सुविधा न के बराबर थी। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक वह पैदल ही स्कूल व कालेज गईं। प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए वह घर से दूर 4 कि.मी. का रास्ता पैदल तय करती थी, वहीं जब कालेज जाने की बारी आई तब भी सरकाघाट कालेज में स्नातक की डिग्री करने के लिए 12 किलोमीटर पैदल रास्ता तय करना पड़ता था। वह और उनकी बहन साथ में कालेज जाती थीं। एक बार की बात बताते हुए उन्होंने बताया कि जब वे बरसात के समय कालेज से वापस घर आ रहे थे तब अचानक खड्ड का जलस्तर बढ़ गया। जंगल में लकडिय़ां काटने आई महिला ने उन्हें आवाज लगाकर जल्दी खड्ड को पार करने के लिए कहा। खड्ड पार करते हुए उस दिन वह डूबने से बाल-बाल बचीं। यह घटना भी उनके हौसले को कम नहीं कर पाई, वह अपने लक्ष्य की ओर और स्टीकता से आगे बढ़ती रहीं। स्नातक की डिग्री पास करने के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री अंग्रेजी में करने के लिए हमीरपुर महाविद्यालय में दाखिला लिया।


2001 में पास की अलाइड की परीक्षा
हमीरपुर महाविद्यालय में अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की डिग्री कर रही अस्मिता ठाकुर को पिता ने अलाइड की परीक्षा देने के लिए कहा, जिसके के लिए उन्होंने जी तोड़ मेहनत की और पहली ही बार में परीक्षा पास कर ली तथा वर्ष 2002 में कार्यभार संभाल लिया।


पिता को मानती हैं अपना आइडल
बी.डी.ओ. के पद पर तैनात अस्मिता ठाकुर अपने पिता को अपना आइडल मानती हैं। उनके पिता पेशे से किसान थे। पढ़े-लिखे होने के बावजूद उन्होंने अपना जीवन अपने पुरखों की जमीन में खेतीबाड़ी में बिताया, जिसका उनको अभिमान था। एक पिछड़े क्षेत्र में रहने के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों को बढिय़ा व उच्च शिक्षा दिलवाई।

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