Edited By Jyoti M, Updated: 05 Feb, 2026 12:17 PM

गाजियाबाद में तीन बहनों की दुखद मौत ने देशभर को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना का मुख्य कारण ऑनलाइन गेमिंग की लत को माना जा रहा है, जिसने अब बच्चों के डिजिटल एक्सपोजर पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
हिमाचल डेस्क। गाजियाबाद में तीन बहनों की दुखद मौत ने देशभर को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना का मुख्य कारण ऑनलाइन गेमिंग की लत को माना जा रहा है, जिसने अब बच्चों के डिजिटल एक्सपोजर पर एक गंभीर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
हिमाचल प्रदेश के चंबा सदर से कांग्रेस विधायक नीरज नैय्यर ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सोशल मीडिया पर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की है कि शिक्षा के उद्देश्य को छोड़कर, 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
नैय्यर ने अपनी पोस्ट में भावुक होते हुए लिखा:
"बचपन को एल्गोरिदम की नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह समय किसी पर दोष मढ़ने का नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई करने का है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।"
जनता की प्रतिक्रिया और डिजिटल चुनौतियां
विधायक की इस मुहिम को जनता का व्यापक समर्थन मिल रहा है, लेकिन साथ ही अभिभावकों ने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी साझा की हैं। कई यूजर्स ने तर्क दिया कि केवल गेमिंग पर प्रतिबंध पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में स्कूलों द्वारा बच्चों को फोन पर होमवर्क और असाइनमेंट भेजे जा रहे हैं, जो उन्हें स्क्रीन से दूर रखने की राह में बड़ी बाधा है।
कुछ लोगों का मानना है कि पूर्ण प्रतिबंध के बजाय स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, जहाँ बच्चों को तकनीक के लाभ और हानियों के बीच संतुलन बनाना सिखाया जाए।
अधिकांश नागरिकों का मानना है कि यह प्रतिबंध अब 'समय की मांग' बन चुका है क्योंकि डिजिटल लत बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य को गलत दिशा में ले जा रही है।
यह घटना एक चेतावनी है कि तकनीक का अनियंत्रित उपयोग किस कदर घातक हो सकता है। अब गेंद सरकार और समाज के पाले में है कि वे बच्चों के बचपन को इन 'डिजिटल बेड़ियों' से कैसे मुक्त कराते हैं।