Edited By Kuldeep, Updated: 25 Jan, 2026 07:14 PM

हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों को लेकर सख्त कदम उठाए हैं।
शिमला (प्रीति): हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सरकारी कॉलेजों को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। कॉलेजों में सामने आ रही कमियों को दूर करने, अनावश्यक या असंतुलित कर्मी व्यवस्था को सुधारने तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए विभाग ने कॉलेज प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत कॉलेजों से कहा गया है कि वे अपनी आवश्यकताओं का आकलन कर विस्तृत एस्टीमेट तैयार कर विभाग को भेजें, ताकि प्राथमिकता के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई कॉलेजों में लंबे समय से बुनियादी ढांचे, शिक्षण स्टाफ, गैर-शिक्षण कर्मियों की तैनाती और प्रयोगशालाओं जैसी सुविधाओं में कमियां सामने आ रही हैं।
वहीं कुछ संस्थानों में शिक्षकों व कर्मियों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जबकि अन्य कॉलेज स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में विभाग कर्मियों के युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) पर जोर देगा, ताकि जरूरत वाले कॉलेजों में समायोजन किया जा सके और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो। मौजूदा समय में प्रदेश के 21 सरकारी कॉलेजों में छात्रों का नामांकन 100 से कम रह गया है। घटते नामांकन को देखते हुए प्रदेश सरकार अब इन कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता, कोर्स विकल्पों, बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर रही है। आवश्यकता पड़ी तो ऐसे कॉलेजों में नए व्यावसायिक और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी विचार किया जाएगा।
इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए एस्टीमेट करें तैयार
विभाग ने कॉलेज प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने संस्थान की मौजूदा स्थिति का आकलन करें। इसमें कक्षाओं की उपलब्धता, प्रयोगशालाओं की दशा, पुस्तकालय संसाधन, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, होस्टल और खेल सुविधाओं के साथ-साथ शिक्षकों व कर्मचारियों की वास्तविक जरूरत का उल्लेख करना होगा। इन सभी बिंदुओं को शामिल करते हुए तैयार एस्टीमेट विभाग को भेजने को कहा गया है, ताकि बजट आबंटन और प्रशासनिक फैसले सटीक ढंग से लिए जा सकें। उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक डा. अमरजीत कुमार शर्मा का कहना है कि केवल भवन निर्माण या नए पद सृजित करने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
इसके लिए समग्र सुधार जरूरी है। विभागीय स्तर पर यह भी संकेत दिए गए हैं कि जहां आवश्यक होगा, वहां अस्थायी व्यवस्थाओं की समीक्षा कर स्थायी समाधान निकाला जाएगा। साथ ही कॉलेजों को शैक्षणिक गतिविधियों में नवाचार लाने, विद्यार्थियों को आकर्षित करने और ड्रॉपआऊट दर कम करने के लिए ठोस रणनीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।