Shimla: व्यवस्था परिवर्तन से हिमाचल बन रहा पर्यटन हब : मुख्यमंत्री

Edited By Kuldeep, Updated: 14 Jan, 2026 06:47 PM

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हिमाचल प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में वर्तमान प्रदेश सरकार ने एक समग्र और दूरदर्शी पहल शुरू की है।

शिमला (ब्यूरो): हिमाचल प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में वर्तमान प्रदेश सरकार ने एक समग्र और दूरदर्शी पहल शुरू की है। प्रदेश सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की अवधारणा को साकार करते हुए पर्यटन को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय आजीविका और सतत आर्थिक विकास से जोड़ रही है। यह दृष्टिकोण राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित और जिम्मेदार प्रयासों पर आधारित है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हिमाचल प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाओं को नजरअंदाज किया गया। सत्ता में रहते हुए भाजपा न तो कोई ठोस पर्यटन नीति बना सकी और न ही प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक व सतत उपयोग की दिशा में कोई गंभीर प्रयास किया। विशेष रूप से राज्य के विशाल जल संसाधन भाजपा सरकारों की उदासीनता और दूरदृष्टि के अभाव के कारण उपेक्षित पड़े रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने इन विफलताओं को स्वीकार करते हुए और उनसे सबक लेते हुए जल-पर्यटन और ईको-पर्यटन को विकास के प्रमुख स्तंभ के रूप में अपनाया है, जो यह दर्शाता है कि जो काम भाजपा वर्षों में नहीं कर पाई, उसे वर्तमान प्रदेश सरकार ने स्पष्ट नीति और इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ाया है। उन्होंने पौंग डैम झील, जो एक अंतर्राष्ट्रीय महत्व का ‘रामसर वेटलैंड’ क्षेत्र है, भाजपा के शासनकाल में न तो संरक्षण के लिहाज से प्राथमिकता में रही और न ही पर्यटन विकास के मानचित्र पर। कांग्रेस सरकार ने इस ऐतिहासिक उपेक्षा को समाप्त करते हुए पोंग डैम को भारत के प्रमुख पक्षी-दर्शन स्थलों में विकसित करने की ठोस पहल की है।

उन्होंने कहा कि हर वर्ष नवम्बर से फरवरी के बीच साइबेरिया और मंगोलिया से हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, लेकिन पूर्व सरकार ने कभी इस वैश्विक संभावना को स्थानीय रोजगार और पर्यावरणीय शिक्षा से जोड़ने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार शिकारों की सवारी, तैरते हुए पक्षी-दर्शन मंच और गाइडिड बर्ड-वॉचिंग टूर जैसी सुविधाएं विकसित कर यह सिद्ध कर रही है कि पर्यटन और पारिस्थितिकी साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।

गोबिंद सागर झील और तत्तापानी जैसे स्थल दशकों तक भाजपा सरकार की फाइलों में ही सिमटे रहे : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबिंद सागर झील (बिलासपुर) और तत्तापानी जैसे स्थल दशकों तक भाजपा सरकार की फाइलों में ही सिमटे रहे। न बुनियादी ढांचा विकसित किया गया, न स्थानीय युवाओं को जोड़ा गया। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही इन क्षेत्रों को आधुनिक जल-पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित कर यह स्पष्ट कर दिया कि विकास की राह इच्छाशक्ति से होकर गुजरती है, केवल घोषणाओं से नहीं। आज शिकारा, स्पीड बोटिंग, हाऊसबोट, जैट-स्की और वाटर स्कूटर जैसी गतिविधियां इन क्षेत्रों में न केवल पर्यटन बढ़ा रही हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं, जो भाजपा के शासन में संभव नहीं हो सका।

भाजपा ने अपने कार्यकाल में ईको-पर्यटन के नाम पर केवल योजनाएं गिनाईं
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने अपने कार्यकाल में ईको-पर्यटन के नाम पर केवल योजनाएं गिनाईं, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी नीति लागू नहीं की। इसके विपरीत कांग्रेस सरकार की ईको-पर्यटन नीति के अंतर्गत विभिन्न वन मंडलों में 77 नए ईको-पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। यह पहल न केवल राजस्व सृजन करेगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार पर्यटन का उदाहरण बनाएगी। भाजपा शासन में पर्यटन क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार का साधन बनने के बजाय ठहराव का शिकार रहा। कांग्रेस सरकार ने इस स्थिति को बदलने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन स्टार्टअप योजना शुरू की है, जिसके तहत होम स्टे, होटल और फूड वैन जैसे उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। यह योजना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि जहां भाजपा सरकार युवाओं को अवसर देने में असफल रही, वहीं वर्तमान सरकार उन्हें आत्मनिर्भर उद्यमी बना रही है।

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