Edited By Swati Sharma, Updated: 30 Jan, 2026 02:34 PM

Himachal AQI: हिमाचल प्रदेश के शिमला और बद्दी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लगभग दो महीने तक मध्यम से बहुत खराब श्रेणी में रहने के बाद बार-बार बारिश और खराब मौसम से काफी सुधार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि एक्यूआई में सबसे ज़्यादा सुधार बद्दी...
Himachal AQI: हिमाचल प्रदेश के शिमला और बद्दी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के लगभग दो महीने तक मध्यम से बहुत खराब श्रेणी में रहने के बाद बार-बार बारिश और खराब मौसम से काफी सुधार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि एक्यूआई में सबसे ज़्यादा सुधार बद्दी औद्योगिक क्षेत्र में देखा गया, जहां बुधवार को यह गिरकर 66 हो गया, यह जनवरी में पहला दिन था जब सूचकांक 100 से नीचे आया।
अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो महीनों में बद्दी का एक्यूआई ज़्यादातर खराब और बहुत खराब श्रेणी में रहा, कभी-कभी खतरनाक स्तर तक पहुंच गया। उन्होंने बताया कि हालांकि 23 जनवरी को हुई बारिश से कुछ समय के लिए राहत मिली, लेकिन एक्यूआई लगातार 100 से ऊपर बना हुआ था। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश ने आखिरकार इस इलाके पर छाई प्रदूषण की चादर को हटा दिया। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि बारिश की वजह से धूल के कण ज़मीन पर जम गए, खासकर वे जो खनन गतिविधियां, अधूरे राजमार्ग निर्माण और भारी औद्योगिक ट्रैफिक से पैदा हुए थे।
एक्यूआई का स्तर सबसे अच्छा शिमला और सुंदरनगर में रहा
वरिष्ठ अभियंता प्रवीण गुप्ता ने कहा कि बद्दी में प्रदूषण के लिए खुले टिपर ट्रक, फोर-लेन सड़क निर्माण से निकलने वाली धूल और गाड़ियों की आवाजाही मुख्य वजहें थीं। इंडस्ट्रीज़ को बोर्ड की गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है, और निरीक्षण के दौरान जहां भी नियम तोड़ने का पता चला, वहां कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक्यूआई में सुधार सिर्फ बद्दी तक ही सीमित नहीं रहा। राज्य के सभी जिलों में इसका स्तर 100 से नीचे रहा। एक्यूआई का स्तर सबसे अच्छा शिमला और सुंदरनगर में रहा जहां यह 27 और 42 रहा, जो अच्छी श्रेणी में है। बारिश के बाद बरोटीवाला, नालागढ़, परवाणू, काला अंब, तेलीवाल और नांगल ऊना जैसे औद्योगिक इलाकों में भी प्रदूषण के स्तर में साफ़ कमी देखी गई। पर्यावरणविद् लक्ष्मी चंद ठाकुर और बालकिशन ने बताया कि बद्दी-नालागढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर औद्योगिकीकरण से पहले, एक्यूआई स्तर आम तौर पर 50 से नीचे रहता था। उन्होंने इसके बाद की गिरावट के लिए मौसमी नालों में बिना नियम के खनन , बढ़ते औद्योगिक प्रदूषण , बढ़ते यातायात दबाव और सड़कों की खराब हालत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'आज, यहां प्रदूषण का स्तर बड़े शहरों जैसा है, और लोगों को अक्सर सांस लेने में दिक्कत होती है।'
बीमारियों से जूझ रहे लोगों को होगा फ़ायदा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इस सुधार से खास तौर पर अस्थमा के मरीज़ों और सांस की पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फ़ायदा होगा। उन्होंने हालांकि चेतावनी दी कि ठंड और नमी के संपकर् में आने से गले में संक्रमण हो सकता है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक खराब सड़कों की हालत, खनन की धूल, निर्माण गतिविधियां और बिना रोक-टोक गाड़यिों से निकलने वाले प्रदूषण जैसी लगातार समस्याओं को ठीक नहीं किया जाता, तब तक सूखा मौसम लौटने पर एक्यूआई का स्तर फिर से खराब हो सकता है।