Edited By Jyoti M, Updated: 19 Mar, 2026 10:40 AM

हिमाचल प्रदेश में कुदरत ने एक बार फिर अपनी करवट बदली है, जिससे पूरी देवभूमि शीतलहर की चपेट में आ गई है। बर्फीली हवाओं और आसमान से गिरते सफेद फाहे (बर्फ) ने न केवल तापमान को गिरा दिया है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय जनजीवन पर भी 'ब्रेक' लगा दिया है।
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश में कुदरत ने एक बार फिर अपनी करवट बदली है, जिससे पूरी देवभूमि शीतलहर की चपेट में आ गई है। बर्फीली हवाओं और आसमान से गिरते सफेद फाहे (बर्फ) ने न केवल तापमान को गिरा दिया है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय जनजीवन पर भी 'ब्रेक' लगा दिया है। चोटियों पर जमी चांदी और निचले इलाकों में हो रही रिमझिम ने प्रदेश के मिजाज को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
रास्तों पर पहरा: अटल टनल और दर्रों पर आवाजाही बंद
ताजा हिमपात के कारण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। रोहतांग के ऊंचे शिखरों और अटल टनल के आसपास भारी बर्फ जमा होने के कारण वाहनों के पहिये थम गए हैं। पुलिस ने नेहरूकुंड के पास ही बैरिकेडिंग कर पर्यटकों और स्थानीय गाड़ियों को रोक दिया है।
यही हाल जलोड़ी दर्रे का भी रहा; जिसे कड़ी मशक्कत के बाद खोला गया था, उसे शाम होते-होते कुदरत के सफेद कहर के कारण फिर से बंद करना पड़ा। लाहौल, किन्नौर और कुल्लू के ऊंचे इलाकों में लगातार हो रही बर्फबारी के चलते यात्रा करना फिलहाल जोखिम भरा बना हुआ है।
मौसम विभाग ने आने वाले दो दिनों (वीरवार और शुक्रवार) के लिए राज्य के छह प्रमुख जिलों में 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है, जो भारी बारिश और बर्फबारी की ओर इशारा कर रहा है। इसके साथ ही, किन्नौर को छोड़कर बाकी पांच जिलों में 'येलो अलर्ट' की स्थिति बनी हुई है। मैदानी और कम ऊंचाई वाले इलाकों, जैसे ऊना और शिमला, में भी मौसम के तेवर तल्ख हैं। धूल भरी ठंडी हवाएं 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है, जिससे ठिठुरन और बढ़ेगी। कुल्लू और लाहौल-स्पीति में दर्जनों बिजली के ट्रांसफार्मर तकनीकी खराबी या बर्फ के बोझ के कारण बंद हो गए हैं, जिससे कई इलाके अंधेरे में डूबे हैं।
लाहौल-स्पीति में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 130 से ज्यादा सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। कुल्लू में भी मुख्य मार्गों सहित 11 लिंक रोड बर्फ की चादर तले दबे हुए हैं। कोकसर, चंद्रा घाटी और घेपन पीक जैसे पर्यटन स्थल पूरी तरह से सफेद चादर में लिपटे हुए हैं, जिससे तापमान शून्य के करीब पहुंच गया है।
हालांकि, मनाली से केलांग के बीच हल्के वाहनों के लिए रास्ता साफ करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन खराब मौसम बार-बार बाधा बन रहा है। फिलहाल, पहाड़ों की यात्रा करने वालों को बेहद सतर्क रहने और मौसम की पल-पल की जानकारी लेकर ही घर से निकलने की सलाह दी गई है।