Edited By Vijay, Updated: 12 Feb, 2026 05:21 PM

देवभूमि कुल्लू में फाल्गुन संक्रांति का पावन पर्व नई ऊर्जा और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। वीरवार को ब्रह्म मुहूर्त में जिलेभर के उन तमाम मंदिरों के कपाट खुल गए, जो पिछले 2 महीनों से स्वर्ग प्रवास के कारण बंद थे।
भुंतर (सोनू): देवभूमि कुल्लू में फाल्गुन संक्रांति का पावन पर्व नई ऊर्जा और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। वीरवार को ब्रह्म मुहूर्त में जिलेभर के उन तमाम मंदिरों के कपाट खुल गए, जो पिछले 2 महीनों से स्वर्ग प्रवास के कारण बंद थे। कपाट खुलते ही घाटी के देवस्थलों पर जयकारों की गूंज सुनाई दी और श्रद्धालुओं ने 2 महीने के लंबे अंतराल के बाद देवी-देवताओं के दर्शन किए।
मान्यता है कि पौष माह में देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर चले जाते हैं, जिसके चलते मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और सभी प्रकार के धार्मिक उत्सवों व देव कार्यों पर रोक लग जाती है। फाल्गुन संक्रांति के दिन देवताओं के पृथ्वी पर वापस लौटने के साथ ही मंदिरों में रौनक लौट आई है। जिला देवी-देवता कारदार संघ कुल्लू के अध्यक्ष दोत राम ठाकुर ने बताया कि अब श्रद्धालु मंदिरों में जाकर दर्शन कर सकेंगे और आने वाले दिनों में देवताओं के रथ व देव-औजार भी लोगों के निमंत्रण पर उनके घर जा सकेंगे।
मंगलेश्वर महादेव ने गौ संरक्षण और निरंतर यज्ञ करने पर दिया जोर
छेंऊर गांव स्थित मंगलेश्वर महादेव के मंदिर में कपाट खुलने के बाद विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। इस दौरान देवता ने अपने गुर वेद राम के माध्यम से 'भारथा' (देववाणी) में बताया कि स्वर्ग प्रवास के दौरान देव-दानव युद्ध में देवताओं की विजय हुई है। देवता ने भविष्य को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समाज में धर्म और कर्म के कार्यों में निरंतरता नहीं रही तो भविष्य में बड़ी आपदाओं का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से गौवंश के संरक्षण और गुप्त यज्ञ व पाठ आदि को निरंतर जारी रखने का आदेश दिया। देवता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव जाति की रक्षा तभी संभव है, जब लोग अपने संस्कारों और देव-कारजों से जुड़े रहें। इस अवसर पर पुजारी इंद्र शर्मा, कारदार नानक चंद नेगी और पूर्व बीडीसी सदस्य ओम प्रकाश सहित देवलू उपस्थित रहे।
जिले में उत्सव जैसा रहा माहौल
फाल्गुन संक्रांति पर जिले के प्रमुख देवालयों जैसे बिजली महादेव, भृगु ऋषि, ऋषि गार्गाचार्य, देवी पटंती, देवी भागासिद्ध, देवी चामुंडा, नैना भगवती, देवता नारायण, देवता वीर और देवी अंबिका सहित अन्य मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। ब्रह्म मुहूर्त में कपाट खुलने के बाद सुबह करीब साढ़े 9 बजे से कई स्थानों पर देवताओं ने गुरों के माध्यम से वार्षिक भविष्यफल सुनाना शुरू किया। कुल्लू के विभिन्न क्षेत्रों में अगले एक सप्ताह तक देवताओं की भविष्यवाणी का क्रम जारी रहेगा। लोग अपने और समाज के भविष्य के बारे में जानने के लिए मंदिरों में उमड़ रहे हैं। अब से घाटी में यज्ञ, अनुष्ठान और शादियों जैसे मांगलिक कार्यों की भी शुरूआत हो जाएगी, जो देव प्रवास के दौरान थमे हुए थे।