हिमाचल में गहराया आर्थिक संकट: कर्मचारियों काे न डीए मिलेगा न एरियर, सबसिडी और विकास कार्यों पर भी लटकी तलवार

Edited By Vijay, Updated: 08 Feb, 2026 02:20 PM

economic crisis in himachal employees will receive neither da nor arrear

हिमाचल प्रदेश सरकार अब तक के सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रही है। सरकार की वित्तीय स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि उसने कर्मचारियों की देनदारियों से लेकर विकास कार्यों तक, हर मोर्चे पर असमर्थता जतानी शुरू कर दी है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार अब तक के सबसे भीषण आर्थिक दौर से गुजर रही है। सरकार की वित्तीय स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि उसने कर्मचारियों की देनदारियों से लेकर विकास कार्यों तक, हर मोर्चे पर असमर्थता जतानी शुरू कर दी है। वित्त विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने प्रदेश की डगमगाती अर्थव्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

कर्मचारियों और पैंशनरों को बड़ा झटका
सुक्खू सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह कर्मचारियों और पेंशनरों को अब न तो महंगाई भत्ता (DA) दे पाएगी और न ही एरियर। वित्त विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार पर वेतन और पैंशन संशोधन का लगभग 8,500 करोड़ रुपए और डीए/डीआर एरियर का 5,000 करोड़ रुपए बकाया है, जिसे चुकाने में सरकार ने पूर्ण असमर्थता जताई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि नया पे-कमीशन तो दूर, वर्तमान में चल रहे वेतन ढांचे को संभालना भी मुश्किल हो रहा है। सरकार अब डीए की अगली किस्त जारी करने की स्थिति में भी नहीं है।

PunjabKesari

हिमकेयर-सहारा योजना और विकास कार्यों पर लगा ग्रहण
प्रदेश में आम जनता से जुड़ी कल्याणकारी योजनाएं और विकास कार्य ठप्प होने के कगार पर हैं। सरकार ने माना है कि वह 'हिमकेयर' और 'सहारा' जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं की देनदारियां चुकाने में सक्षम नहीं है। इसके अलावा, लगभग 2,000 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की देनदारियां अगले वित्त वर्ष के लिए पेंडिंग हो गई हैं। सरकार के पास केंद्र प्रायोजित योजनाओं के लिए मैचिंग ग्रांट देने तक का पैसा नहीं बचा है, जिसके चलते कोई भी नया विकास कार्य शुरू करना असंभव होगा।

सबसिडी पर संकट, यूपीएस पर होगा पुनर्विचार
आर्थिक तंगी का असर अब कानूनी और नीतिगत फैसलों पर भी पड़ रहा है। कोर्ट के आदेशों के मुताबिक सरकार को करीब 1,000 करोड़ रुपए का भुगतान करना है, लेकिन खजाना खाली होने के कारण सरकार यह राशि देने की स्थिति में भी नहीं है। बिगड़ते हालात को देखते हुए सरकार को अब सभी प्रकार की सब्सिडी बंद करने जैसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। साथ ही, वित्तीय बोझ को देखते हुए सरकार को अब यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर भी गंभीरता से पुनर्विचार करना होगा।

सब कुछ बंद करने के बाद भी 6 हजार करोड़ का घाटा
भविष्य की तस्वीर और भी चिंताजनक है। विश्लेषण के मुताबिक यदि सरकार अपनी सभी पुरानी देनदारियां रोक दे, चल रही विकास परियोजनाओं को बंद कर दे और सबसिडी भी खत्म कर दे तो भी आगामी वित्त वर्ष में सरकार को लगभग 6,000 करोड़ रुपए का घाटा रहने का अनुमान है। यह आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि हिमाचल प्रदेश एक ऐसे आर्थिक भंवर में फंस चुका है, जिससे निकलना मौजूदा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!