Edited By Jyoti M, Updated: 04 Feb, 2026 02:11 PM

कांगड़ा घाटी में नशे का जहर घोलने वाले एक शातिर खिलाड़ी के सफ़र पर पुलिस ने पूर्णविराम लगा दिया है। पालमपुर का रहने वाला शुभकरण, जिसे अपराधी जगत में 'शिवु' के नाम से जाना जाता है, अब धर्मशाला जेल की कालकोठरी में अपनी हरकतों का हिसाब देगा।
हिमाचल डेस्क। कांगड़ा घाटी में नशे का जहर घोलने वाले एक शातिर खिलाड़ी के सफ़र पर पुलिस ने पूर्णविराम लगा दिया है। पालमपुर का रहने वाला शुभकरण, जिसे अपराधी जगत में 'शिवु' के नाम से जाना जाता है, अब धर्मशाला जेल की कालकोठरी में अपनी हरकतों का हिसाब देगा। यह गिरफ्तारी केवल एक रूटीन कार्रवाई नहीं है, बल्कि उन अपराधियों के लिए कड़ी चेतावनी है जो कानून की ढिलाई का फायदा उठाकर बार-बार समाज को नुकसान पहुँचाते हैं।
क्यों खास है यह गिरफ्तारी?
आरोपी शिवु कोई नौसिखिया नहीं, बल्कि नशे के कारोबार का पुराना खिलाड़ी है। इसके खिलाफ पुलिस फाइलों में चिट्टा और चरस जैसे जानलेवा पदार्थों की तस्करी के चार संगीन मामले पहले से दर्ज हैं। विडंबना यह थी कि हर बार पकड़े जाने और जमानत मिलने के बाद, वह सुधारने के बजाय और अधिक सक्रियता से युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने लगता था।
उसकी इसी आदतन अपराधी प्रवृत्ति को देखते हुए, कांगड़ा पुलिस ने इस बार एक अलग और सख्त कानूनी रास्ता चुना।
'PIT NDPS' का ब्रह्मास्त्र और पुलिस की घेराबंदी
जब सामान्य धाराएं शिवु को रोकने में नाकाम रहीं, तो पुलिस विभाग ने निवारक हिरासत अधिनियम (PIT NDPS Act, 1988) का इस्तेमाल किया। 23 जनवरी 2026 को सक्षम प्राधिकारी ने उसे 3 महीने के लिए बिना जमानत जेल में रखने (निवारक निरोध) के आदेश जारी किए।
हालाँकि, गिरफ्तारी की भनक लगते ही आरोपी ने 'चूहे-बिल्ली' का खेल शुरू कर दिया और अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को छकाने लगा।
विशेष टीम को मिली सिद्धवाड़ी में सफलता
भगोड़े तस्कर को पकड़ने के लिए पालमपुर पुलिस ने एक स्पेशल सीक्रेट सेल का गठन किया। कई दिनों तक कांगड़ा के अलग-अलग इलाकों में छापेमारी और कड़ी निगरानी के बाद, आखिरकार 3 फरवरी 2026 को पुलिस ने घेराबंदी कर उसे सिद्धवाड़ी से धर दबोचा।
पुलिस का संदेश: "बख्शा नहीं जाएगा"
जिला पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कांगड़ा में नशे के सौदागरों के लिए कोई जगह नहीं है। 'जीरो टॉलरेंस' की नीति के तहत अब केवल केस दर्ज नहीं किए जाएंगे, बल्कि समाज के लिए खतरा बन चुके तस्करों को इसी तरह निवारक हिरासत के जरिए लंबे समय तक समाज से दूर रखा जाएगा।