Edited By Swati Sharma, Updated: 25 Jan, 2026 06:19 PM

Himachal AQI: धूल, जंगल की आग, खनन गतिविधि और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण लंबे समय तक सूखे मौसम के बाद हाल ही में हुई बारिश और बफर्बारी से हिमाचल प्रदेश में हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। बारिश-बर्फबारी ने हवा में मौजूद धूल और प्रदूषकों...
Himachal AQI: धूल, जंगल की आग, खनन गतिविधि और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण लंबे समय तक सूखे मौसम के बाद हाल ही में हुई बारिश और बफर्बारी से हिमाचल प्रदेश में हवा की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। बारिश-बर्फबारी ने हवा में मौजूद धूल और प्रदूषकों की सफाई में मदद की है, जिससे अधिकांश शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सामान्य और मध्यम स्तर पर आ गया है। सबसे बड़ी राहत बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र में देखी गयी है, जिसे लंबे समय से राज्य का सबसे प्रदूषित क्षेत्र माना जाता रहा है। क्षेत्र का एक्यूआई गिरकर 104 हो गया है।
शिमला में सबसे साफ हवा की गई दर्ज
हाल तक, बद्दी में एक्यूआई का स्तर 200 से ऊपर रहता था और कभी-कभी 300 को भी पार कर जाता था, जिससे निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंताएं पैदा हो रही थीं। राजधानी शिमला में सबसे साफ हवा दर्ज की गयी, जहां एक्यूआई पहले दर्ज किए गए लगभग 110 से नाटकीय रूप से सुधरकर 41 हो गया, जिससे यह अच्छी श्रेणी में आ गया। राज्य के अन्य शहरों में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। परवाणू में एक्यूआई 49, सुंदरनगर में 59, धर्मशाला में 57, मनाली में 71, ऊना में 74, डलहौजी में 60, कलांब में 89 और पोंटा साहिब में 132 दर्ज किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कहा कि पीएम10 और पीएम2.5 कणों के जमने में बारिश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने रेत और निर्माण सामग्री को खुले वाहनों में ले जाने पर रोक जैसे नियामक कदमों की ओर भी इशारा किया, जो धूल प्रदूषण का एक प्रमुख कारण था, खासकर औद्योगिक क्षेत्रों में।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने दी ये चेतावनी
बोर्ड ने स्वीकार किया कि अनियंत्रित यातायात, औद्योगिक उत्सर्जन और खनन गतिविधियां लगातार चुनौतियां बनी हुई हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि हालांकि बारिश और बफर्बारी प्राकृतिक और तत्काल राहत प्रदान करते हैं, लेकिन यह सुधार अस्थायी हो सकता है। एक बार जब सूखा मौसम वापस आने पर बेहतर सड़क रखरखाव, खनन तथा निर्माण गतिविधियों से पैदा होने वाली धूल पर सख्त नियंत्रण और वाहनों तथा औद्योगिक उत्सर्जन की कड़ी निगरानी सहित निरंतर कारर्वाई स्वस्थ हवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जरूरी होगी।