Edited By Swati Sharma, Updated: 22 Jan, 2026 12:28 PM

Himachal News : हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक आधुनिक व पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 5100 से अधिक राशन डिपुओं में अब करीब साढ़े 19 लाख परिवारों को फेस ऑथेंटिकेशन और आई-स्कैनिंग के जरिए...
Himachal News : हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक आधुनिक व पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया जा रहा है। प्रदेश के सभी 5100 से अधिक राशन डिपुओं में अब करीब साढ़े 19 लाख परिवारों को फेस ऑथेंटिकेशन और आई-स्कैनिंग के जरिए राशन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए जल्द ही नई अत्याधुनिक पॉस (POS) मशीनें उपलब्ध करवाई जाएंगी।
जल्द लगेंगी नई हाईटेक मशीनें
खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रदेश के सभी डिपुओं में पुरानी मशीनों की जगह नई तकनीक से लैस पॉस मशीनें लगाई जाएंगी। इन मशीनों से उपभोक्ताओं को अब फिंगरप्रिंट या ओटीपी जैसी तकनीकी दिक्कतों से भी राहत मिलेगी। परिवार के किसी भी सदस्य की फेस पहचान या आंखों की स्कैनिंग से राशन प्राप्त किया जा सकेगा। इसके लिए सभी राशन कार्डधारकों के सदस्यों की ई-केवाईसी पहले ही पूरी कर ली गई है।
डिजिटल बिल की सुविधा
नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को राशन वितरण का डिजिटल बिल भी प्रिंट कर दिया जाएगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। खाद्य आपूर्ति निदेशालय शिमला की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्तीय वर्ष में यह व्यवस्था लागू कर दी जाए।
टेंडर प्रक्रिया अंतिम चरण में
खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय शिमला के निदेशक आरके गौतम ने बताया कि डिपुओं में वर्तमान में इस्तेमाल हो रही पुरानी पॉस मशीनों को हटाकर नई मशीनें वितरित की जाएंगी। इसके लिए टेंडर की अंतिम प्रक्रियाएं चल रही हैं, ताकि उपभोक्ताओं को सरल, सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से राशन मिल सके।
राज्य में 19.60 लाख राशन कार्डधारक
प्रदेश में वर्तमान में 19 लाख 60 हजार से अधिक राशन कार्डधारक हैं। इन्हें लगभग 5100 उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से अंत्योदय, बीपीएल और पीएचएच परिवारों को मुफ्त व रियायती दरों पर, जबकि एपीएल और अन्य श्रेणियों को सब्सिडी आधारित सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाता है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अनुसार, नए वित्तीय वर्ष से राशन डिपुओं में यह नई तकनीक लागू होने से वितरण व्यवस्था अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनेगी।