Edited By Jyoti M, Updated: 02 Jan, 2026 12:21 PM

पहाड़ों की शांत सुबह अचानक उस वक्त चीखों और धुएं के गुबार में बदल गई, जब नालिंग-2 गांव में एक रिहायशी मकान आग की लपटों से घिर गया। यह हादसा सिर्फ एक संपत्ति का नुकसान नहीं था, बल्कि एक पल की देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती थी।
हिमाचल डेस्क। पहाड़ों की शांत सुबह अचानक उस वक्त चीखों और धुएं के गुबार में बदल गई, जब नालिंग-2 गांव में एक रिहायशी मकान आग की लपटों से घिर गया। यह हादसा सिर्फ एक संपत्ति का नुकसान नहीं था, बल्कि एक पल की देरी किसी की जान पर भारी पड़ सकती थी। जिस वक्त मकान धू-धू कर जल रहा था, घर का चिराग अंदर गहरी नींद में था, जिसे ग्रामीणों ने अदम्य साहस दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाला।
जब धुआं बना खतरे का संकेत
शुक्रवार की सुबह करीब 6:45 बजे जब गांव जागने की तैयारी कर रहा था, तभी बुधराम के दो मंजिला काष्ठकुणी शैली के घर से आग की लपटें उठने लगीं। लकड़ी का ढांचा होने के कारण आग ने पलक झपकते ही विकराल रूप धारण कर लिया। ऊपरी मंजिल से उठती लपटों को देख ग्रामीण तुरंत मौके की ओर दौड़े।
जांबाजी से बची सुभाष की जान
हादसे के समय घर के निचले हिस्से में बुधराम का बेटा सुभाष सोया हुआ था, जिसे ऊपर मचे तांडव की भनक तक नहीं थी। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए बंद दरवाजे को तोड़ा और सुभाष को नींद से जगाकर बाहर निकाला। यदि ग्रामीण सही समय पर सक्रिय न होते, तो एक बड़ा जानी नुकसान हो सकता था।
सूने घर पर बरपा कुदरत का कहर
विडंबना यह रही कि घटना के समय परिवार के मुखिया बुधराम अपने स्वास्थ्य उपचार के चलते ज्यूरी में थे और उनकी पत्नी किसी व्यक्तिगत कार्य से गांव में ही कहीं और गई हुई थीं। देखते ही देखते उनकी आंखों के सामने ही रसोई सहित चारों कमरे जलकर पूरी तरह स्वाहा हो गए। आग इतनी भीषण थी कि ग्रामीणों की कोशिशें भी उसे शांत करने में नाकाम रहीं।
प्रशासन से मदद की गुहार
पंचायत प्रधान रामेश्वर नेगी ने तत्काल मौके का मुआयना कर प्रशासन को अवगत कराया। राजस्व विभाग की टीम वर्तमान में नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। हालांकि आग लगने की असल वजह अब भी रहस्य बनी हुई है, लेकिन इस अग्निकांड में परिवार की जीवनभर की जमापूंजी खाक हो गई है। स्थानीय निवासियों ने सरकार से मांग की है कि बेघर हुए इस परिवार को तुरंत उचित मुआवजा और सहायता प्रदान की जाए।