Himachal: 108 और 102 कर्मियों ने सरकार को दिया अल्टीमेटम, इस दिन से थम जाएंगे एम्बुलेंस के पहिये

Edited By Jyoti M, Updated: 08 Feb, 2026 02:41 PM

himachal 108 and 102 employees have given an ultimatum to the government

हिमाचल प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के पहिये एक बार फिर थमने की कगार पर हैं। अपनी अनदेखी से क्षुब्ध होकर एम्बुलेंस कर्मियों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश की जीवनदायिनी मानी जाने वाली 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं के पहिये एक बार फिर थमने की कगार पर हैं। अपनी अनदेखी से क्षुब्ध होकर एम्बुलेंस कर्मियों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।

संकट में 'संजीवनी': 

हिमाचल के दुर्गम रास्तों पर मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनने वाले एम्बुलेंस कर्मचारी अब खुद के हक के लिए सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। मांगों की अनसुनी से नाराज कर्मचारी यूनियन ने 12 फरवरी सुबह 8 बजे से 17 फरवरी तक पूर्ण कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। मंडी जिला इकाई के पदाधिकारियों, सुमित कपूर और पंकज कुमार के अनुसार, यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो प्रदेश की आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।

आखिर क्यों उपजा यह आक्रोश?

कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से शोषण का शिकार हो रहे हैं। उच्च न्यायालय और श्रम न्यायालय द्वारा तय किए गए न्यूनतम वेतन को तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।

12 घंटे की कड़ी ड्यूटी करने वाले कर्मियों को 8 घंटे के बाद के अतिरिक्त समय के लिए दोगुना भुगतान मिले।

एम्बुलेंस सेवा में वर्षों से चली आ रही 'ठेका प्रथा' को जड़ से खत्म किया जाए और कर्मियों के भविष्य के लिए एक ठोस सरकारी नीति बनाई जाए।

पूर्व में विरोध प्रदर्शन के कारण नौकरी से निकाले गए साथियों को वापस लिया जाए। साथ ही वार्षिक 10% वेतन वृद्धि, पीएफ और ग्रेच्युटी जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।

व्यवस्था परिवर्तन की पुकार

यूनियन का तर्क है कि जब तक प्रबंधन कंपनियां श्रम कानूनों का मखौल उड़ाती रहेंगी, तब तक स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर किया जाए।

कर्मचारियों ने प्रदेश की जनता से सहानुभूति की अपील करते हुए कहा है कि यह लड़ाई केवल उनकी व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक पारदर्शी और शोषण मुक्त स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस हड़ताल से उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए सरकार और निजी प्रबंधन कंपनी सीधे तौर पर उत्तरदायी होंगे।

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