Himachal: योद्धा हूं, युद्ध की तरह ही लड़ेंगे हिमाचल के हितों की लड़ाई : सुक्खू

Edited By Kuldeep, Updated: 08 Feb, 2026 06:48 PM

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रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट (आरडीजी ) की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जुड़ा विषय है।

शिमला (राक्टा): रैवेन्यू डैफिसिट ग्रांट (आरडीजी ) की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जुड़ा विषय है। प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार है। प्रदेश सचिवालय में रविवार को वित्त विभाग द्वारा राज्य की वित्तीय स्थिति तथा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के प्रभावों पर दी गई प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त किया जाता है, तो राज्य की जनता के अधिकारों को सुरक्षित रख पाना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तुति में शामिल होने के लिए भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि हम तो योद्धा हैं और युद्ध की तरह ही हिमाचल के हितों की लड़ाई लड़ी जाएगी

उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से ही आता है और देश में दूसरा सबसे अधिक आरडीजी का हिस्सा हिमाचल को मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद कर संग्रह की दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि पूर्व में यह 13 से 14 प्रतिशत थी। हिमाचल प्रदेश एक उत्पादक राज्य है जबकि जीएसटी उपभोग आधारित कर है, इसलिए इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य की जनसंख्या 75 लाख है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर लगाने की क्षमता भी राज्य से छीन ली गई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को आश्वासन दिया कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा। राज्य के संसाधनों में वृद्धि करने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस दिशा में पहले दिन से ही संकल्पित प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार संसाधन जुटाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को मिलकर प्रदेश के हितों के लिए लड़ाई लड़नी होगी। जिन बिजली परियोजनाओं ने पूरा ऋण चुका दिया है, केंद्र सरकार को ऐसी परियोजनाओं पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा जिन परियोजनाओं के संचालन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें राज्य को वापस लौटाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

4500 करोड़ स्पए की बकाया राशि नहीं मिली
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के 4500 करोड़ रुपए की बकाया राशि राज्य को नहीं मिली है, जबकि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला भी आ चुका है। उन्होंने कहा कि शानन पावर प्रोजैक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे पंजाब सरकार से वापस लेने के लिए राज्य कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।

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