Edited By Jyoti M, Updated: 27 Mar, 2026 11:31 AM

आजकल डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ-साथ सेंधमारी का खतरा भी बढ़ गया है। साइबर अपराधियों ने अब लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने के लिए 'ई-पैन कार्ड' को अपना नया हथियार बनाया है।
हिमाचल डेस्क। आजकल डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ-साथ सेंधमारी का खतरा भी बढ़ गया है। साइबर अपराधियों ने अब लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने के लिए 'ई-पैन कार्ड' को अपना नया हथियार बनाया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला साइबर सेल ने एक ताजा एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को आगाह किया है कि पैन कार्ड डाउनलोड करने के नाम पर चल रहा यह खेल आपकी जमा-पूंजी को पल भर में गायब कर सकता है।
जालसाजी का 'सरकारी' चेहरा
ठगी का यह तरीका बेहद शातिराना है। इसमें यूजर को एक ऐसा ईमेल प्राप्त होता है जो दिखने में हूबहू किसी आयकर विभाग या सरकारी संस्था का लगता है। ईमेल में दावा किया जाता है कि आपका ई-पैन तैयार है, जिसे नीचे दिए गए लिंक से डाउनलोड करें।
जैसे ही आप उस लिंक पर क्लिक करते हैं, आपके फोन या कंप्यूटर का एक्सेस हैकर्स के पास पहुंच सकता है, जिससे आपके बैंक पासवर्ड और अन्य निजी डेटा चोरी हो जाते हैं। इन जाली मेल्स का एकमात्र मकसद आपको डराकर या जल्दबाजी में निर्णय लेने पर मजबूर करके आपकी संवेदनशील जानकारी हासिल करना होता है।
असली और नकली की पहचान कैसे करें?
सरकारी ईमेल हमेशा आधिकारिक डोमेन (जैसे .gov.in) से आते हैं। अगर ईमेल आईडी अटपटी या निजी सर्वर की लगे, तो वह फर्जी है। ठग अक्सर 'तुरंत करें' या 'अंतिम चेतावनी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं ताकि आप बिना सोचे-समझे क्लिक कर दें। किसी भी अनजान फाइल या पीडीएफ को डाउनलोड करने से बचें, क्योंकि इनमें खतरनाक वायरस हो सकते हैं।
केवल आधिकारिक पोर्टल का करें उपयोग
पैन कार्ड एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है। अगर आपको अपना ई-पैन डाउनलोड करना है, तो ईमेल के शॉर्टकट के बजाय सीधे अधिकृत वेबसाइट्स का रुख करें।
चेक करें कि आपका पैन किस एजेंसी के माध्यम से बना है और उसी के पोर्टल पर जाकर प्रक्रिया पूरी करें। एक छोटी सी सावधानी और सही जानकारी ही आपको इन डिजिटल लुटेरों से बचा सकती है। किसी भी संदिग्ध लिंक को खोलने से पहले दो बार सोचें।