Himachal: फागली उत्सव में देवता कतरूसी नारायण ने की भविष्यवाणी, जानें क्या होगा इस साल

Edited By Vijay, Updated: 26 Feb, 2026 07:39 PM

deity katrusi narayan

कुल्लू जिले की लगघाटी के रोपड़ी, रूजग और ग्रामंग गांवों में फागली उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आयोजित होने वाले इस पारंपरिक उत्सव में घाटी के आराध्य देव कतरूसी नारायण....

कुल्लू: कुल्लू जिले की लगघाटी के रोपड़ी, रूजग और ग्रामंग गांवों में फागली उत्सव धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आयोजित होने वाले इस पारंपरिक उत्सव में घाटी के आराध्य देव कतरूसी नारायण के दर्शनों के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद ले रहे हैं।

उत्सव का मुख्य आकर्षण देवता के गुर द्वारा की जाने वाली भविष्यवाणियां रहीं। देवता कतरूसी नारायण के गुर नील चंद, भजन, पवन और मोहर सिंह ने देव खेल के माध्यम से सालभर की बड़ी घटनाओं का संकेत दिया। देव वाणी के अनुसार इस वर्ष फसल की पैदावार अच्छी रहेगी, जिससे किसानों के चेहरे खिलने की उम्मीद है। हालांकि देवता ने आधुनिकता की दौड़ में पुरानी परंपराओं को भूलने पर चिंता जताई, साथ ही आगामी वर्ष में बीमारियों के फैलने की चेतावनी देते हुए लोगों को सचेत रहने को कहा है। देवता के गुर ने बताया कि घाटी के सभी देवी-देवता अपनी गठरी में इस वर्ष कुछ न कुछ शुभ लेकर आए हैं, जो क्षेत्र के कल्याण का प्रतीक है।

उत्सव के दौरान हारियानों ने देवता से अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं से संबंधित कई प्रश्न किए, जिनका समाधान देवता ने गुर के माध्यम से दिया। उत्सव में विशेष जाति से संबंध रखने वाले अशोक ने बताया कि उनका देवता के साथ अत्यंत निकटतम संबंध है। उनके बिना देवता की पारंपरिक कार्यवाही अधूरी मानी जाती है। उन्होंने कहा कि फागली के दौरान देवता अपने जन्म व कुल्लू जिले के अन्य देवी-देवताओं के साथ अपने संबंधों के बारे में गूढ़ जानकारी देते हैं।

तारापुरी कोठी के आराध्य देव कतरूसी नारायण के आशीर्वाद से यह मेला विभिन्न गांवों खोपरी, रोपड़ी, भलियाणी और जठानी में मनाया जाता है। कारदार रूम सिंह नेगी ने बताया कि इस उत्सव का धार्मिक महत्व इतना अधिक है कि ग्रामीण अपने ज्येष्ठ पुत्र का मुंडन संस्कार भी इस अवसर पर करवाते हैं। इस समागम में ग्रामीण शुद्ध घी देवता को अर्पित करते हैं। फाल्गुन मास के आरंभ में जब देवता अपने मंदिर से बाहर निकलते हैं तो शुद्ध घी से विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है, जिसे हारियानों और ग्रामीणों में वितरित किया जाता है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई।

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