Edited By Jyoti M, Updated: 26 Mar, 2026 10:36 AM

हिमाचल प्रदेश सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है, जिन्हें काम के सिलसिले में रोजाना पंजाब या अन्य राज्यों में आना-जाना पड़ता है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में घोषणा की कि ऐसे दैनिक...
हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश सरकार सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले उन लोगों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है, जिन्हें काम के सिलसिले में रोजाना पंजाब या अन्य राज्यों में आना-जाना पड़ता है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में घोषणा की कि ऐसे दैनिक यात्रियों के लिए विशेष 'पास' बनाए जाएंगे ताकि उन्हें बार-बार एंट्री टैक्स न देना पड़े। इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए आगामी कैबिनेट बैठक में फैसला लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एंट्री टैक्स कोई नया कानून नहीं है, बल्कि यह पिछले 30 वर्षों से लागू है। उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें टैक्स में भारी बढ़ोतरी की बात कही जा रही थी। सुक्खू ने कहा कि फास्टैग (Fastag) प्रणाली से जुड़ने के कारण शुल्क में कुछ बदलाव जरूर हुए हैं, लेकिन हिमाचल की निजी गाड़ियों से कोई टैक्स नहीं वसूला जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इस टैक्स से सालाना लगभग 228 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाना है, जो पिछले साल के मुकाबले 54 करोड़ रुपये अधिक होगा।
सदन में चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सीमावर्ती क्षेत्रों जैसे गगरेट, पांवटा साहिब और नालागढ़ के निवासियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। विधायकों का सुझाव था कि सीमाओं के 5 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को छूट मिलनी चाहिए। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि जहां नेशनल हाईवे का टोल और राज्य का एंट्री बैरियर एक साथ हैं, वहां यात्रियों को दो बार टैक्स न देना पड़े, इस पर भी विचार किया जा रहा है।
दैनिक यात्रियों को पास: रोज सीमा पार करने वालों को बार-बार टैक्स नहीं देना होगा। पास बनाने की प्रक्रिया पर जल्द ही कैबिनेट की मुहर लगेगी। टैक्स प्रणाली में सुधार से सरकार को 54 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की उम्मीद है। हिमाचल नंबर की निजी कारों पर यह टैक्स लागू नहीं है।