Shimla: पैंशनर्ज का डीए फ्रीज किया तो सरकार को भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

Edited By Kuldeep, Updated: 09 Feb, 2026 05:19 PM

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राजस्व अनुदान घाटा (आरडीजी) बंद किए जाने के बाद प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर वित्त विभाग द्वारा दी गई प्रैजैंटेशन के बाद हिमाचल प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से एक आपात बैठक का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता समिति...

शिमला (राक्टा): राजस्व अनुदान घाटा (आरडीजी) बंद किए जाने के बाद प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर वित्त विभाग द्वारा दी गई प्रैजैंटेशन के बाद हिमाचल प्रदेश पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति ने सोमवार को वर्चुअल माध्यम से एक आपात बैठक का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने की। बैठक में प्रदेश कार्यकारिणी के पदाधिकारियों महासचिव इंद्र पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा, मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी, प्रैस सचिव चेत राम वर्मा व लायक राम शर्मा, शिमला जिला के संयोजक मोहन ठाकुर, जिला प्रधान भाग चंद चौहान सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि यदि राज्य सरकार यदि आरडीजी का बहाना बनाकर प्रदेश के पैंशनर्ज और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज करने तथा एरियर न देने का फैसला लेती है तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

बैठक में कड़ा रोष जताते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि जिस प्रकार प्रधान वित्त सचिव ने सरकार को वित्तीय प्रैजैंटेशन में जो सुझाव दिए हैं, वह पूरी तरह पैंशनर्ज और कर्मचारियों के हितों के खिलाफ हैं। समिति के चेयरमैन सुरेश ठाकुर ने संपर्क किए जाने पर कहा कि आरडीजी बंद होने की आड़ में पैंशनर्ज और कर्मचारियों का डीए फ्रीज करना तथा एरियर न देने का प्रस्ताव पूरी तरह से अस्वीकार्य है। साथ ही चेताया है कि यदि सरकार 1 सप्ताह के भीतर सरकार द्वारा पैंशनर्ज की मांगों पर बातचीत के लिए समिति के प्रतिनिधिमंडल को नहीं बुलाया जाता है तो आगामी 17 और 18 फरवरी को शिमला में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद बजट सत्र के पहले दिन रोष रैली निकाली जाएगी और प्रतिदिन धरना दिया जाएगा।

सुरेश ठाकुर ने कहा कि एक तरफ पैंशनर्ज और कर्मचारियों की देनदारियों को रोकने की बात की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के प्रतिनिधियों और अन्य सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने हिमकेयर व सहारा योजना और सामाजिक सुरक्षा पैंशन में कटौती के प्रस्ताव की भी कड़े शब्दों में निंदा की। सुरेश ठाकुर ने कहा कि सरकार अपने चहेतों को खुश करने के लिए सरकारी खजाने पर बोझ न डाले और पैंशनर्ज व कर्मचारियों की करोड़ों रुपए की देनदारियों से पला न झाड़ कर उन्हें देने बारे अधिसूचना जारी करे। साथ ही विधायकों, मंत्रियों केे वेतन व पैंशन मैं कटौती करे तथा चेयरमैन, वाइस चेयरमैन व सलाहकारों को हटाए ताकि सरकारी खर्चों में कटौती हो सके।

राज्यपाल से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
समिति ने यह भी घोषणा की है कि 18 फरवरी को एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलेगा और उन्हें ज्ञापन सौंपेगा। सुरेश ठाकुर ने कहा है कि इस दौरान राज्यपाल से प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार को अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने का अनुरोध करेगा।

मुख्य मांगें
समिति के अनुसार सरकार जल्द से जल्द 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रैच्युटी, लीव इनकैशमैंट, कम्युटेशन व संशोधित पैंशन की अदायगी सुनिश्चित करे। इसके साथ ही 13 प्रतिशत डीए व 146 माह का एरियर जारी किया जाए। इसी तरह एचआरटीसी पैंशनर्ज को समय पर पैंशन, बिजली बोर्ड कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ, चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए 15 करोड़ रुपए जारी करना सहित अन्य मांगें मुख्य रूप से शामिल हैं।

 

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