Shimla: HRTC की 4 वर्कशॅाप्स को आऊटसोर्स करने की तैयारी, तकनीकी कर्मचारी भड़के

Edited By Kuldeep, Updated: 29 Jan, 2026 06:01 PM

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एचआरटीसी की 4 कर्मशालाओं (वर्कशॉप्स) को आऊटसोर्स पर दिए जाने की तैयारी को लेकर निगम के तकनीकी कर्मचारी भड़क गए हैं।

शिमला (राजेश): एचआरटीसी की 4 कर्मशालाओं (वर्कशॉप्स) को आऊटसोर्स पर दिए जाने की तैयारी को लेकर निगम के तकनीकी कर्मचारी भड़क गए हैं। वहीं हिमाचल पथ परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन ने प्रदेश सरकार व निगम प्रबंधन को चेतावनी जारी की है कि यदि कर्मशालाओं को आऊटसोर्स में देकर निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया तो प्रदेश के तकनीकी कर्मचारी प्रदेश स्तरीय आंदोलन करेंगे। इसी संबंध मेें वीरवार को हिमाचल पथ परिवहन तकनीकी कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने शिमला में प्रैस वार्ता की। संगठन के चेयरमैन पूर्ण चंद ने कहा कि एच.आर.टी.सी. प्रबंधन प्राथमिक दौर मेें निगम की 4 कर्मशालाओं रामपुर, नालागढ़, शिमला ग्रामीण व पठानकोट को आऊटसोर्स करने जा रहा है। इसमें 2 कर्मशालाओं रामुपर व नालागढ़ के टैंडर भी हो गए हैं, जिसका संगठन पूर्ण विरोध करता है।

उन्होंने कहा कि संगठन निगम प्रबंधन व सरकार से लगातार कर्मशालाओं में तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती करने का मांग कर रहा है लेकिन सरकार व निगम कर्मचारियों की भर्ती न कर कर्मशालाओं को आऊटसोर्स पर दे रहे हैं, जिससे तकनीकी कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ट्रांसफर कर दिया जाएगा। वहीं दूसरी ओर कइयों का रोजगार भी खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हजारों छात्र आईटीआई करते हैं, जिन्हें कर्मशालाओं में ट्रेनिंग दी जाती है वहीं इन्हीं छात्राें को आगे चलकर नौकरी भी मिलती है लेकिन इससे आईटीआई छात्रों को न तो ट्रेनिंग मिलेगी और न ही नौकरी। कर्मशालाओं को आऊटसोर्स करने से जहां कर्मचारी तो प्रभावित होगा ही, साथ में बेरोजगारी भी बढ़ेगी। इस मौके पर संगठन प्रधान खेम चंद व संगठन सदस्य दिनेश, कुलदीप, विजय व अन्य मौजूद रहे।                     

3 हजार बसों में मात्र 1100 तकनीकी कर्मचारी दे रहे सेवाएं
पूर्ण चंद ने बताया कि एचआरटीसी में 1700 बसों पर 2267 कर्मचारियों का स्टाफ था, लेकिन अब प्रदेश मेें बसों की संख्या भी बढ़ गई और बसों की संख्या करीब 3 हजार हो गई है। जिस पर मौजूदा समय पर मात्र 1100 तकनीकी कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। कर्मशालाओं में कर्मचारियों की कमी के बावजूद तकनीकी कर्मचारी ओवरटाइम लगाकर बसों की मुरम्मत कर रहे हैं और बसों को सड़कों पर चलने के लिए तैयार कर रहे हैं लेकिन निगम प्रबंधन कर्मशालाओं को आऊटसोर्स कर कर्मचारियों को बेरोजगारी की ओर बढ़ा रहा है।

मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से बैठक के लिए मांगा जाएगा समय
संगठन पदाधिकारियों ने निगम प्रबंधन व सरकार से कर्मशालाओं को आऊटसोर्स करने के निर्णय को वापस लेने की मांग की है। वहीं संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि फरवरी माह के पहले सप्ताह में प्रदेश स्तरीय बैठक होगी और इसमें आगामी आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से बैठक के लिए समय मांगा जाएगा।

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