Shimla: अमरीका के दबाव के आगे झुकने की बजाय देशहित में दृढ़ निर्णय लिए जाएं : राठौर

Edited By Kuldeep, Updated: 06 Jan, 2026 05:48 PM

shimla national interest decision

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि अमरीकी चुनाव के बाद जिस तरह वैश्विक स्तर पर टैरिफ और दबाव की राजनीति तेज हुई है, उससे भारत की संप्रभुता और बागवानों व किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं,...

शिमला (राक्टा): कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुलदीप सिंह राठौर ने शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि अमरीकी चुनाव के बाद जिस तरह वैश्विक स्तर पर टैरिफ और दबाव की राजनीति तेज हुई है, उससे भारत की संप्रभुता और बागवानों व किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार किसी भी अंतर्राष्ट्रीय समझौते से पहले पहाड़ी राज्यों के किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे तथा अमरीका के दबाव के आगे झुकने की बजाय देशहित में दृढ़ निर्णय लिए जाएं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी को मित्र बताते हैं, वहीं दूसरी तरफ रूस से कच्चे तेल के आयात और भारत की नीतियों पर असंतोष जताते हैं। इसी तरह भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान ट्रंप द्वारा युद्ध विराम करवाने का दावा और पाकिस्तान के जनरल को व्हाइट हाऊस में आमंत्रित करना भारत की जनता को असहज करने वाला कदम था। इसके बावजूद केंद्र सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई, जो चिंताजनक है।

राठौर ने चेताया कि अमरीका द्वारा जीरो टैरिफ जैसे दबावों का सबसे बड़ा नुक्सान हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों को होगा। राठौर ने न्यूजीलैंड के साथ हुए समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि आयात शुल्क में 25 प्रतिशत तक की कटौती से स्थानीय बागवानों में निराशा है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपे, लेकिन केंद्र ने गंभीरता नहीं दिखाई। राठौर ने एक सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो पहल ने देश को जोड़ने का संदेश दिया।

विदेश नीति पर उठाए सवाल
राठौर ने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में पड़ोसी देशों नेपाल, बंगलादेश, श्रीलंका और अन्यों के साथ संबंध कमजोर हुए हैं। बंगलादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर भारत की प्रभावी कूटनीतिक भूमिका नहीं दिखती। देश के भीतर महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक तनाव बढ़ रहा है तथा इन मूल समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए विभाजनकारी माहौल बनाया जा रहा है।

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