Edited By Kuldeep, Updated: 15 Mar, 2026 07:05 PM

एचआरटीसी की नई इलैक्ट्रिक बसें मार्च माह मेें प्रदेश में पहुंचनी थीं, लेकिन अभी यह बसें प्रदेश में नहीं पहुंची हैं। बसों की खेप हिमाचल न पहुंचने से निगम को बसों की कमी भी झेलनी पड़ रही है। वहीं बसों की कमी के कारण कई रूट भी प्रभावित हो रहे हैं।
शिमला (राजेश): एचआरटीसी की नई इलैक्ट्रिक बसें मार्च माह मेें प्रदेश में पहुंचनी थीं, लेकिन अभी यह बसें प्रदेश में नहीं पहुंची हैं। बसों की खेप हिमाचल न पहुंचने से निगम को बसों की कमी भी झेलनी पड़ रही है। वहीं बसों की कमी के कारण कई रूट भी प्रभावित हो रहे हैं। निगम द्वारा टैंडर में तय की गई शर्तों के अनुसार बसों की डिलीवरी न करने पर कंपनी को भी इससे नुक्सान उठाना पड़ेगा। टैंडर की शर्तों के अनुसार कुल लागत का 10 प्रतिशत जुर्माना लग सकता है।
जानकारी के अनुसार इन बसों की खरीद के लिए 424.01 करोड़ रुपए का टैंडर हुआ है। ऐसे में 42 करोड़ के करीब जुर्माना कंपनी पर लग सकता है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में हाल ही में आयोजित निदेशक मंडल बीओडी की बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा भी हुई है। बीओडी ने निगम प्रबंधन को यह भी कहा है कि टैंडर की तय शर्तों के अनुसार ही इस मामले में कार्रवाई की जाए। जुर्माना लगाने से पहले कंपनी का पक्ष भी सुन लिया जाए।
कंपनी ने बताए थे देरी के कारण
कंपनी ने बसों की डिलीवरी में देरी के लिए तकनीकी कारण बताए हैं। इसमें कहा गया है कि इन ई-बसों की बैटरी में एक चिप लगती है, यह चीन में निर्मित होती है। चिप आने में हो रही देरी की वजह से ही मामला लटका हुआ है। निगम प्रबंधन का तर्क है कि टैंडर में शर्तें पहले से तय थीं। कंपनी को बस की डिलीवरी के लिए पहले ही 11 महीने का समय दिया गया था, जो काफी ज्यादा है।
निगम प्रबंधन के अधिकारी मान रहे हैं कि कंपनी ने जो तर्क दिए हैं, वे वाजिब हैं, लेकिन प्रबंधन टैंडर में निहित शर्तों पर अड़ा हुआ है। कंपनी ने निगम प्रबंधन से आग्रह किया है कि उन पर जुर्माना न लगाया जाए, अप्रैल महीने से वह बसों की डिलीवरी करना शुरू कर देंगे। देरी की तकनीकी वजह बताते हुए कहा गया है कि 10 प्रतिशत की राशि काफी ज्यादा है। उनका जो प्रॉफिट शेयर है, वह भी इतना नहीं है।
सुविधाओं से लैस होंगी ई-बसें
निगम प्रबंधन के अनुसार नई ई-बस 30 सीटर है। इसे आधे घंटे में चार्ज किया जा सकेगा। एक बार चार्ज करने पर यह 180 किलोमीटर तक चलेगी। इसकी लागत 1.71 करोड़ रुपए है। कंपनी इसके रखरखाव की जिम्मेदारी 12 साल तक लेगी।
अभी एक बस पहुंची है ट्रायल के लिए
कंपनी ने अभी एक बस ट्रायल के लिए भेजी थी। इसका शिमला व सोलन के बाद प्रदेश के 36 अन्य स्थानों पर ट्रायल किया गया है। इसमें कुछ बदलाव के आदेश प्रबंधन ने कंपनी को दिए हैं।
एचआरटीसी उपाध्यक्ष अजय वर्मा का कहना है कि इलैक्ट्रिक बसों की डिलीवरी में जितनी देरी होगी, कंपनी को इससे उतना की नुक्सान उठाना पड़ेगा। टैंडर की शर्तों में यह पहले से तय किया गया है। वहीं मार्च में यह बसें देने का फैसला लिया गया था। कंपनी को जल्द बसों की डिलीवरी की हिदायत दी गई है।