सूखा, ओलावृष्टि व तूफान से 3 लाख मीट्रिक टन फलों को नुक्सान

Edited By Kuldeep, Updated: 23 May, 2022 11:42 PM

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हिमाचल प्रदेश में इस साल पहले सूखा तथा फिर ओलावृष्टि व तूफान से बागवानी को भारी नुक्सान होने का अनुमान है। अभी तक विभाग ने बागवानी क्षेत्र में 3 लाख मीट्रिक टन फलों का नुक्सान होने का अनुमान लगाया गया है।

शिमला (भूपिन्द्र): हिमाचल प्रदेश में इस साल पहले सूखा तथा फिर ओलावृष्टि व तूफान से बागवानी को भारी नुक्सान होने का अनुमान है। अभी तक विभाग ने बागवानी क्षेत्र में 3 लाख मीट्रिक टन फलों का नुक्सान होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें सेब सहित आम व लीची आदि सभी फल शामिल हैं। सर्दियों में अच्छी बर्फबारी तथा बारिश को देखते हुए विभाग ने इस साल प्रदेश में 9 लाख मीट्रिक टन फलों के उत्पादन का अनुमान लगाया था, जिसमें 7 लाख मीट्रिक टन सेब है। यदि अब मौसम सामान्य रहा तो राज्य में 6 लाख मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जिसमें साढ़े 4 लाख टन सेब का उत्पादन शामिल है, लेकिन यदि अब फिर से तूफान, ओलावृष्टि व मौसम के प्रतिकूल रहने पर यह उत्पादन और गिर सकता है। प्रदेश में गत वर्ष कुल 6 लाख 24 हजार 485 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ था, जिसमें सेब उत्पादन की मात्रा 4 लाख 81 हजार 2 मीट्रिक टन है। वहीं वर्ष 2020 में 8 लाख 45 हजार 422 मीट्रिक टन फलों का उत्पादन हुआ था, जिसमें 7 लाख 15 हजार 253 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन है। बागवानी विभाग इस साल बम्पर फसल का अनुमान लगा रहा था, लेकिन अब इस बार गत वर्ष से भी कम फसल होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रदेश में अभी तक बागवानी को 61 करोड़ और कृषि को 272.2 करोड़ का नुक्सान
हिमाचल प्रदेश में सूखे तथा ओलावृष्टि व तूफान के कारण बागवानी को 61 करोड़ रुपए का नुक्सान हो चुका है। इसी तरह कृषि को भी 272.2 करोड़ रुपए के नुक्सान का अनुमान है। नुक्सान का यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

बागवानों व किसानों को जल्द राहत प्रदान करे सरकार : संजय
किसान संघ के संयोजक संजय चौहान ने सरकार से बागवानों व किसानों को राहत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कई छोटे किसानों व बागवानों को अधिक नुक्सान हुआ है। इसलिए सरकार जल्द से जल्द नुक्सान का सही आकलन कर उन्हें राहत राशि जारी करे।

आम सहित संतरा, मौसमी व माल्टा उत्पादकों को भी भारी नुक्सान : पठानिया
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सुरेश पठानिया ने कहा कि सूखे व गर्मी के कारण आम, मौसमी, माल्टा व संतरा आदि फलों में भी ड्रॉपिंग हो रही है। आम में 20 से 25 फीसदी और मौसमी व संतरा आदि में 50 फीसदी से अधिक ड्रॉपिंग हो चुकी है। उन्होंने सरकार से बागवानों को हो रहे इस नुक्सान की भरपाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकार से छोटे बागवानों व किसानों के साथ-साथ बड़े बागवानों को भी राहत देने का आग्रह किया है।

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