Shimla: BPL का चयन बना ग्रामीण विकास विभाग के लिए गले की फांस

Edited By Kuldeep, Updated: 15 Jan, 2026 11:35 PM

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ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के लिए बीपीएल परिवारों का चयन करना गले की फांस बन गई है।

शिमला (ब्यूरो): ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के लिए बीपीएल परिवारों का चयन करना गले की फांस बन गई है। बीते वर्ष प्रथम फेज के करवाए गए बीपीएल सर्वे में अधिकांश परिवार सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों से बाहर हो गए हैं और अब दूसरे फेज के सर्वे के लिए 12 जनवरी को अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसमें कुछ नियमों में राहत प्रदान की गई है।

इसके तहत पक्के मकान वाले परिवारों को भी शामिल किए जाने बारे उल्लेख किया है। इसके अतिरिक्त इस अधिसूचना में ऐसे परिवार जिनमें 27 वर्ष तक की आयु के अनाथ बच्चे सदस्य हों अथवा ऐसे परिवार जिनमें 59 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वृद्धजन सदस्य हों अथवा 27 से 59 आयु वर्ग का कोई भी सक्षम वयस्क सदस्य न हो ऐसे परिवार को बीपीएल में शामिल किया जाएगा। इसी प्रकार जिन परिवारों में महिला मुखिया हो तथा जिनमें 27 से 59 वर्ष की आयु के मध्य कोई सक्षम पुरुष सदस्य न हो, अर्थात जिनमें विधवा, अविवाहिता, तलाकशुदा व परित्यक्ता महिलाएं सम्मिलित हों। बुद्धजीवियों का मानना है कि प्रथम फेज में सर्वे बिल्कुल सही हुआ है।

अधिकांश परिवारों के पास पक्के मकान, सभी सुख-सुविधाएं, दोपहिया और चौपहिया वाहन रखे हुए हैं। केवल कुछ परिवार ही ऐसे हैं जिनके पास कच्चे मकान हैं अथवा सरकारी स्कीम से बने हुए पक्के मकान हैं। इससे पहले बीपीएल के चयन में काफी धांधलियां हुई हैं। साधन संपन्न परिवारों ने संयुक्त परिवार को राशनकार्ड में पृथक दिखाकर बीपीएल के लाभ लिए हैं।

इस वर्ग का कहना है कि पात्र व्यक्तियों को पहले की भांति बीपीएल में आने से वंचित न रखा जाए, बल्कि परिवार की वास्तविक घरेलू परिस्थिति को मद्देनजर रखते हुए पारदर्शिता से चयन किया जाए। बता दें कि नकदी फसलों ने लोगों की किस्मत बदल दी है। अधिकांश परिवारों के पास शहर जैसी सुख-सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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