Shimla: सहकार से समृद्धि केवल नारा नहीं, गांव-गांव तक पहुंचता है विकास का मॉडल : अनुराग

Edited By Kuldeep, Updated: 17 Feb, 2026 07:13 PM

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सहकार से समृद्धि अब केवल नारा नहीं, अपितु गांव-गांव तक पहुंचता विकास मॉडल बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करेगा और मोदी सरकार का बजट 2026-27 सहकार से समृद्धि की भावना को ओर सुदृढ़ करने वाला है।

शिमला (ब्यूरो): सहकार से समृद्धि अब केवल नारा नहीं, अपितु गांव-गांव तक पहुंचता विकास मॉडल बन चुका है, जो आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर भारत की नींव को और मजबूत करेगा और मोदी सरकार का बजट 2026-27 सहकार से समृद्धि की भावना को ओर सुदृढ़ करने वाला है। पूर्व केंद्रीय मंत्री व हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने यहां जारी बयान में कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 सहकारी क्षेत्र को मजबूत प्रोत्साहन प्रदान करता है और यह सहकारिता के लिए केवल प्रतीकात्मक बजट नहीं है, बल्कि एक परिणाम-उन्मुख ढांचा है, जो प्राथमिक कृषि ऋण समितियों, सहकारी विपणन, निर्यात, मूल्य संवर्धन और ग्रामीण रोजगार को मजबूत करता है, साथ ही राजकोषीय संयम और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।

राष्ट्रीय स्तर पर, बजट में सहकारिता मंत्रालय को 2026–27 के लिए 1,744.74 करोड़ प्रदान किए गए हैं, जो केंद्र की सहकारी-नेतृत्व वाली विकास प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। एक प्रमुख जोर पीएसीएस की कम्प्यूटरीकरण पर है, जिसमें 2026–27 में अकेले 364 करोड़ आबंटित किए गए हैं, जिससे हजारों समितियां अपने खाते डिजिटाइज कर सकेंगी, कोर बैंकिंग सिस्टम, डीबीटी प्लेटफॉर्म और कृषि-बाजार पोर्टलों से जुड़ सकेंगी। इस सुधार से लेन-देन लागत में काफी कमी आएगी, ऋण अनुशासन में सुधार होगा और करोड़ों किसान-सदस्यों को संस्थागत वित्त तक समय पर पहुंच मिलेगी।

पीएसीएस डिजिटाइजेशन को पूरक बनाने के लिए बजट में सहकारियों को आईटी हस्तक्षेपों से मजबूत करने के लिए 26 करोड़ आबंटित किए गए हैं, जिसमें सॉफ्टवेयर मानकीकरण, प्रशिक्षण और शासन सुधारों पर ध्यान केंद्रित है। यह डिजिटल निवेश सहकारियों को पारदर्शी, बैंकेबल और राष्ट्रीय वित्तीय तथा विपणन प्रणालियों के साथ अंतर संचालित बनाएंगे, जो ग्रामीण ऋण और संग्रहण में स्केल और दक्षता अनलॉक करने के लिए आवश्यक कदम है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को केंद्रीय क्षेत्र अनुदान समर्थन के रूप में 500 करोड़ मिलना जारी है, जो भंडारण, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, डेयरी, मत्स्य पालन और मूल्य संवर्धन में सहकारी-नेतृत्व वाले परियोजनाओं के लिए निरंतर फंडिंग सुनिश्चित करता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड के लिए 450 करोड़ का ऐतिहासिक आबंटन सहकारिता को वैश्विक बाजारों में प्रवेश करने में सक्षम बनाएगा, जिसमें संग्रहण, गुणवत्ता प्रमाणन, लॉजिस्टिक्स और निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर का समर्थन शामिल है। इस कदम से किसान और उत्पादक सहकारियां अंतर्राष्ट्रीय मूल्य श्रृंखलाओं से सीधे जुड़ेंगी, जिससे मूल्य प्राप्ति में सुधार होगा और विदेशी मुद्रा आय बढ़ेगी। राजकोषीय पक्ष पर, बजट में लक्षित कर उपाय पेश किए गए हैं, जो सहकारी बैलेंस शीट को मजबूत करते हैं।

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