Edited By Vijay, Updated: 01 Feb, 2026 01:41 PM

हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियां अब धरातल पर सफल होती दिखाई दे रही हैं। प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से जोगिंद्रनगर उपमंडल के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
मंडी (रजनीश): हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियां अब धरातल पर सफल होती दिखाई दे रही हैं। प्रदेश सरकार के प्रोत्साहन से जोगिंद्रनगर उपमंडल के किसानों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है। विकास खंड चौंतड़ा के गांव टिक्करी मुशैहरा के अजय कुमार और ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी ने कड़ी मेहनत और सरकारी सहयोग से अपनी आमदनी बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है।
एमएसपी मिलने से अजय कुमार की राह हुई आसान
गांव टिक्करी मुशैहरा के अजय कुमार वर्ष 2003 से ही प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। वे बताते हैं कि शुरुआती दौर में उन्हें अपनी फसल बेचने में बहुत दिक्कतें आती थीं, क्योंकि न तो कोई उचित बाजार था और न ही दाम तय थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्राकृतिक उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू कर किसानों को बड़ी राहत दी है। इसी का नतीजा है कि हाल ही में अजय ने सरकार को 2 क्विंटल मक्की बेचकर 6,000 रुपए से अधिक की कमाई की। उन्होंने इन किसान हितैषी नीतियों के लिए सरकार का आभार जताया है।
वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती से जुड़ी हैं कमला देवी
दूसरी तरफ, ग्राम पंचायत सगनेहड़ की कमला देवी वर्ष 2018 से प्राकृतिक खेती कर रही हैं। बिना रासायनिक खाद और कीटनाशकों के खेती करने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी फायदे भी मिले हैं। कमला देवी के साथ लगभग 20 महिलाओं का एक समूह कार्य कर रहा है, जो सामूहिक रूप से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ा रहा है। इस समूह ने हाल ही में सरकार को 2 क्विंटल मक्की और 6 क्विंटल गेहूं एमएसपी पर बेचा। सरकार ने फसल की कीमत के साथ-साथ उन्हें 2 रुपए प्रति क्विंटल का परिवहन भत्ता भी दिया। इस तरह कमला देवी के समूह को सरकार की ओर से कुल 37,200 रुपए का भुगतान किया गया।

रागी और सब्जियों से हो रही अतिरिक्त कमाई
अजय कुमार और कमला देवी का समूह केवल अनाज तक सीमित नहीं है। वे प्राकृतिक तरीके से सब्जियां, रागी और अन्य फसलें भी उगा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक आत्मा परियोजना के तहत गांव में ही आयोजित 2 दिवसीय शिविर में कमला समूह को प्राकृतिक खेती की बारीकियां सिखाई गई थीं। अब आलम यह है कि इनके द्वारा उगाई गई रागी को व्यापारी गांव से ही अच्छे दामों पर खरीद कर ले जा रहे हैं।
सरकार ने तय किए हैं आकर्षक दाम
प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ाने के लिए सरकार ने फसलों के बेहद आकर्षक दाम तय किए हैं। इसके तहत मक्की का एमएसपी 40 रुपए प्रति किलो, गेहूं का 60 रुपए प्रति किलो और प्राकृतिक हल्दी का भाव 90 रुपए प्रति किलो निर्धारित किया गया है। इन दामों के कारण क्षेत्र के अन्य किसान भी अब तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ रहे हैं।
सेहत और समृद्धि का दिया संदेश
कमला देवी का मानना है कि प्राकृतिक खेती से न केवल जेब भरती है, बल्कि परिवार को रसायनों से मुक्त शुद्ध और सुरक्षित भोजन भी मिलता है। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में प्राकृतिक खेती को अपनाएं। अजय और कमला की यह सफलता कहानी साबित करती है कि अगर सरकार का सहयोग और सही प्रशिक्षण मिले तो किसान ग्रामीण विकास की धुरी बन सकते हैं।