Edited By Vijay, Updated: 06 May, 2026 03:04 PM

मंडी नगर निगम चुनावों के बीच एक चौंकाने वाला और अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है। नगर निगम के वार्ड नंबर-14 (बैहना) में चुनावी सरगर्मियां उस वक्त पूरी तरह थम गईं, जब स्थानीय ग्रामीणों की एकजुटता के आगे चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों ने सामूहिक रूप से...
मंडी (रजनीश): मंडी नगर निगम चुनावों के बीच एक चौंकाने वाला और अभूतपूर्व घटनाक्रम सामने आया है। नगर निगम के वार्ड नंबर-14 (बैहना) में चुनावी सरगर्मियां उस वक्त पूरी तरह थम गईं, जब स्थानीय ग्रामीणों की एकजुटता के आगे चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशियों ने सामूहिक रूप से अपने-अपने नामांकन पत्र वापस ले लिए। इस बड़े उलटफेर के बाद वार्ड नंबर-14 में चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से अधर में लटक गई है।
क्यों लिया गया ये फैसला?
इस सामूहिक फैसले के पीछे मुख्य कारण बैहना वार्ड के निवासियों की वह पुरानी मांग है, जिसमें वे अपने क्षेत्र को नगर निगम की सीमा से बाहर करने की वकालत कर रहे हैं। ग्रामीणों का स्पष्ट तर्क है कि जब से उनके क्षेत्र को नगर निगम में शामिल किया गया है, उन पर टैक्स (कर) का भारी बोझ तो डाल दिया गया है, लेकिन उसके अनुपात में शहरी सुविधाएं उन तक बिल्कुल नहीं पहुंची हैं। इसी बात को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष है।
पद से ज्यादा जनता प्यारी, प्रत्याशियों ने छोड़ा मैदान
क्षेत्र की जनता की इसी मांग और कड़े विरोध को देखते हुए चुनावी मैदान में उतरे सभी उम्मीदवारों ने जनभावनाओं का सम्मान किया। प्रत्याशियों ने स्वेच्छा से चुनाव न लड़ने का ऐतिहासिक निर्णय लिया और अपने नामांकन वापस ले लिए। उम्मीदवारों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि उनके लिए पद या चुनाव से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण अपने क्षेत्र की जनता और उनकी जायज मांगें हैं।
सरकार और प्रशासन को दिया कड़ा संदेश
सामूहिक रूप से नामांकन वापस लेकर बैहना के ग्रामीणों और प्रत्याशियों ने सरकार व प्रशासन को एक बेहद कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनके क्षेत्र को नगर निगम से बाहर करने की मांग पूरी नहीं होती, वे किसी भी प्रकार की चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनेंगे।
चुनाव आयोग और प्रशासन के सामने खड़ी हुई नई चुनौती
एक ही वार्ड से सभी उम्मीदवारों द्वारा अचानक नामांकन वापस लिए जाने से चुनाव आयोग और जिला प्रशासन के सामने एक नई और असहज स्थिति पैदा हो गई है। चुनाव प्रक्रिया बीच में ही रुक जाने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस भारी जन-विरोध और प्रत्याशियों के इस कड़े रुख को देखते हुए आगे क्या कदम उठाती है।
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