Edited By Vijay, Updated: 28 Apr, 2026 01:53 PM

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। स्टेट इलैक्शन कमीशन ने आज दोपहर बाद 3:40 बजे एक महत्वपूर्ण प्रैस कॉन्फ्रैंस बुलाई है, जिसमें पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। स्टेट इलैक्शन कमीशन ने आज दोपहर बाद 3:40 बजे एक महत्वपूर्ण प्रैस कॉन्फ्रैंस बुलाई है, जिसमें पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा। इस घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो जाएगी। आचार संहिता लागू होते ही सरकार की शक्तियों पर लगाम लग जाएगी। इसके बाद सरकार कोई भी नई घोषणा नहीं कर पाएगी। साथ ही, नई भर्तियां, नए टैंडर, तबादले (ट्रांसफर), प्रमोशन, और उद्घाटन-शिलान्यास जैसे कार्यों पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। गौरतलब है कि शहरी क्षेत्रों में पहले से ही आचार संहिता लागू है, अब इसमें ग्रामीण क्षेत्र भी जुड़ जाएंगे।
3758 पंचायतों में 51 लाख वोटर चुनेंगे अपनी सरकार
चुनाव आयोग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं और मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन भी कर दिया गया है। प्रदेश की 3758 पंचायतों में लगभग 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव के दौरान 5 पदों प्रधान, उपप्रधान, वार्ड मैंबर, जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्य के लिए उम्मीदवार मैदान में होंगे।
तीन चरणों में हो सकते हैं चुनाव
आयोग की ओर से चुनाव तीन चरणों में कराने की संभावना है ताकि दुर्गम इलाकों में मतदान सुचारू रहे। दिलचस्प यह है कि पंचायत चुनाव पुरानी पद्धति के अनुसार बैलेट पेपर (मतपत्र) से करवाए जाएंगे, जबकि शहरी निकायों के चुनाव ईवीएम से होते हैं। इन चुनावों में 50 हजार से अधिक कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात किए जाएंगे।
क्यों अहम है ये चुनाव?
सुप्रीम कोर्ट ने 31 मई से पहले पंचायत चुनाव संपन्न करवाने के आदेश दिए हैं, जिसके चलते आयोग समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है। प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो चुका है और तब से वहां सरकार द्वारा नियुक्त एडमिनिस्ट्रेटर काम देख रहे हैं। इस चुनाव के बाद ग्रामीण स्तर पर चुनी हुई सरकारों की वापसी होगी।
सोशल मीडिया पर प्रचार का दौर पहले ही शुरू
पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही प्रदेश में राजनीतिक पारा चढ़ चुका है। उम्मीदवारों की दावेदारी, प्रचार-प्रसार और स्थानीय मुद्दों पर बहस जोरों पर है। हालांकि सोशल मीडिया पर प्रचार का दौर पहले ही शुरू हो चुका है, लेकिन अब चुनाव की विधिवत घोषणा के बाद राजनीतिक गतिविधियां और अधिक तेज होंगी।
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