Edited By Vijay, Updated: 22 Apr, 2026 09:00 PM

प्रदेश के मंडी जिले में 5वीं और 8वीं कक्षा के सभी छात्रों को पास किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। नो-डिटैंशन पॉलिसी वापस लिए लाने के बाद अब पुअर परफॉर्मैंस देने पर उक्त कक्षाओं के छात्रों को फेल करने का प्रावधान है...
शिमला (प्रीति): प्रदेश के मंडी जिले में 5वीं और 8वीं कक्षा के सभी छात्रों को पास किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। नो-डिटैंशन पॉलिसी वापस लिए लाने के बाद अब पुअर परफॉर्मैंस देने पर उक्त कक्षाओं के छात्रों को फेल करने का प्रावधान है, लेकिन इससे पहले ऐसा नहीं था, ऐसे में शिक्षा विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच शुरू कर दी है। मामले पर गड़बड़ी की आशंका जताई गई है, जिसके चलते 39 स्कूलों के प्रधानाचार्यों को संबंधित शिक्षकों के साथ तलब किया गया है। विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी संबंधित स्कूल अपने छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं (आंसर शीट) भी साथ लेकर निदेशालय में पेश हों। अधिकारियों का कहना है कि उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि छात्रों को नियमों के तहत पास किया गया है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई उन स्कूलों के खिलाफ की जा रही है जहां 5वीं और 8वीं कक्षा के सभी छात्रों को बिना उचित मूल्यांकन के पास कर दिया गया। विभाग को शिकायतें मिलने के बाद इस पर संज्ञान लिया गया। निदेशालय ने प्रिंसीपलों को 28 अप्रैल से चरणबद्ध तरीके से बुलाने का शैड्यूल तैयार किया है। हर दिन 4 स्कूलों के प्रिंसिपल और संबंधित शिक्षक जांच के लिए उपस्थित होंगे, ताकि प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से पूरा किया जा सके।
वर्ष 2019 के बाद पॉलिसी में किया गया बदलाव
केंद्र सरकार ने 2019 में आरटीई अधिनियम में संशोधन कर इसे वापस ले लिया और अब राज्य सरकारों को यह तय करने का अधिकार है कि वे 5वीं और 8वीं कक्षा में छात्रों को फेल करें या नहीं। नए नियम के तहत यदि छात्र वार्षिक परीक्षा में फेल होते हैं तो उन्हें 2 महीने के भीतर दोबारा परीक्षा का मौका मिलेगा। इस दूसरी परीक्षा में भी फेल होने पर उन्हें उसी कक्षा में रोका जा सकता है, लेकिन प्रदेश में स्कूल प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसे में विभाग ने इसमें कड़ा रुख अख्तियार किया है।
जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो होगी कार्रवाई : निदेशक
स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली ने स्पष्ट कहा है कि यदि जांच में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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