Himachal : स्कूल की प्रार्थना सभा में 'रमजान' पर भाषण से बवाल, वीडियो वायरल हुआ तो प्रबंधन ने मांगी माफी

Edited By Swati Sharma, Updated: 24 Feb, 2026 12:39 PM

himachal a student s speech on ramadan sparked controversy

Sirmaur News: हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के ददाहू स्थित एक निजी स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान एक छात्रा द्वारा रमजान के महत्व पर दिए गए भाषण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभिन्न संगठनों और...

Sirmaur News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ददाहू स्थित एक निजी स्कूल में उस समय माहौल गरमा गया, जब प्रार्थना सभा में एक छात्रा द्वारा 'रमजान' के महत्व पर दिए गए भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। वीडियो के वायरल होते ही विभिन्न संगठनों और स्थानीय नेताओं ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और मामले में संज्ञान लेने की मांग की। बढ़ते विरोध को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने सफाई पेश करते हुए खेद व्यक्त किया है।

क्या है पूरा मामला?

मामला एकेएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है, जहां 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने मॉर्निंग असेंबली के दौरान रमजान के महत्व, भाईचारे और उसके सकारात्मक संदेशों पर भाषण दिया था। छात्रा ने अपने भाषण की शुरुआत अभिवादन के साथ की थी। स्कूल प्रबंधन ने इस रूटीन एक्टिविटी का वीडियो अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर अपलोड किया था।

विरोध के बाद प्रबंधन ने वीडियो हटाया

वीडियो वायरल होने के बाद हिंदू नेता कमाल गौतम सहित अन्य लोगों ने इसे लेकर आपत्ति जताई और स्कूल प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। बढ़ते विवाद को देखते हुए स्कूल प्रबंधन ने तुरंत प्रभाव से सोशल मीडिया से वीडियो को हटा दिया। विवाद बढ़ता देख स्कूल प्रबंधन ने मामले पर खेद व्यक्त किया है। प्रबंधन समिति के सदस्य विजय कुमार ने स्पष्ट किया कि छात्रा का भाषण कक्षा 11वीं की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' में संकलित सामग्री पर आधारित था। उन्होंने कहा, "यह स्कूल की एक सामान्य शैक्षणिक गतिविधि थी, जिसका उद्देश्य छात्रों को विभिन्न त्योहारों और उनके संदेशों से अवगत कराना था। यदि किसी की भी भावनाएं इससे आहत हुई हैं, तो हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं।"

जानें प्रबंधन के पदाधिकारी ने क्या कहा?

प्रबंधन के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने भी मामले में खेद प्रकट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। यह घटना अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां लोग शैक्षणिक सामग्री के चयन और धार्मिक गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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