Edited By Vijay, Updated: 08 Jan, 2026 06:26 PM

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास राज्य की पहली नियोजित माऊंटेन सैटेलाइट टाऊनशिप बनाने की सरकारी योजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता का माहौल है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पास राज्य की पहली नियोजित माऊंटेन सैटेलाइट टाऊनशिप बनाने की सरकारी योजना के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष और चिंता का माहौल है। जठिया देवी जंक्शन पर वर्षों से सब्जी बेचने वाले नीरज ठाकुर जैसे कई लोगों की दिनचर्या 25 दिसम्बर, 2025 को तब थम गई, जब उन्हें पता चला कि उनका पैतृक गांव उन 9 गांवों की सूची में शामिल है, जिन्हें टाऊनशिप के लिए अधिग्रहित किया जाना है। नीरज का कहना है कि हमें बताया गया कि हमारे खेत और घर ले लिए जाएंगे। सरकार मूल निवासियों को विस्थापित करके नए लोगों के लिए घर बनाने की योजना बना रही है।
अधिग्रहण का नोटिस और प्रभावित क्षेत्र
1374 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली यह टाऊनशिप शिमला शहर से 14 किलाेमीटर और जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे से मात्र 2 किलाेमीटर दूर प्रस्तावित है। इस परियोजना पर वर्ष 2014 से हिमुडा काम कर रहा है। हाल ही में भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 5 और नियम 8 के तहत नोटिस जारी किए गए, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सोशल इंपैक्ट असैसमेंट रिपोर्ट के अनुसार, शिमला ग्रामीण के 8 गांवों चणन, पंती, अंजी, शिल्ली बागी, मझोला, शिलरू, धनोकरी, क्यारगी और सोलन के एक गांव मंजियारी की कुल 249 हैक्टेयर (लगभग 2,959 बीघा) जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे 386 परिवार सीधे प्रभावित होंगे और 158 लोगों की आजीविका छिन सकती है।
किसानों का दर्द: पूरे के पूरे गांव क्यों चाहिए?
शिल्ली बागी के 44 वर्षीय किसान चमन लाल का कहना है कि हम बड़े किसान नहीं हैं, लेकिन खेती ही हमारी आजीविका है। हिमुडा ने पहले बंजर पहाड़ियां ली थीं, लेकिन इस बार वे पूरे गांव क्यों लेना चाहते हैं, यह हमारी समझ से परे है। वहीं, क्यारगी के पुजारी और किसान बाल किशन का कहना है कि यह केवल जमीन का नहीं, बल्कि इतिहास और भावनाओं का मुद्दा है। उन्होंने कहा कि पुश्तैनी जमीन और अपने कुल देवताओं के मंदिरों को छोड़ना आसान नहीं है। बाहरी राज्यों के लोगों को बसाने के लिए पीढ़ियों से रह रहे लोगों को उजाड़ने का क्या औचित्य है?
मुआवजे को लेकर भविष्य की चिंता
परियोजना स्थल से 9 किलाेमीटर दूर बग्ना गांव के 84 वर्षीय बुजुर्ग हीरा सिंह मुआवजे के बंटवारे को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि मेरे और मेरे तीन भाइयों के पास कुल 12 बीघा जमीन है। जब यह जमीन बेटों और पोतों में बंटेगी तो किसी के हाथ क्या आएगा? खेती ही हमारा सहारा है। सरकार को आगे बढ़ने से पहले मुआवजे की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अधिकारियों का आश्वासन, जबरन अधिग्रहण नहीं होगा
विरोध के बीच हिमुडा के सीईओ और सचिव सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ ने भरोसा दिलाया है कि स्थानीय लोगों की मर्जी के खिलाफ कोई जमीन नहीं ली जाएगी। उन्होंने कहा कि 29 दिसम्बर की सुनवाई केवल प्रक्रिया का पहला हिस्सा थी। हम रिहायशी मकानों और उपजाऊ खेतों को अधिग्रहण से बाहर रखेंगे और लोगों को किचन गार्डन के लिए जमीन रखने की अनुमति देंगे। सच तो यह है कि स्थानीय लोगों को ही इस टाऊनशिप से फायदा होगा।
बाहरी लोगों के बसने पर स्पष्टीकरण
स्थानीय लोगों की इस चिंता पर कि सरकार हिमाचलियों को हटाकर बाहरी लोगों को बसा रही है, सीईओ वशिष्ठ ने कहा कि यह नियमों की गलत व्याख्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमुडा की संपत्तियों को धारा 118 (हिमाचल प्रदेश कास्तकारी और भू-सुधार अधिनियम, 1972) से छूट प्राप्त है। भारत का कोई भी नागरिक हिमुडा की संपत्ति खरीद सकता है, लेकिन उस संपत्ति का पूर्ण स्वामी हिमुडा ही रहेगा, राजस्व रिकॉर्ड में केवल खरीदार का नाम दर्ज होगा।
क्या है टाऊनशिप का पूरा प्लान?
प्रस्तावित जठिया देवी टाऊनशिप का उद्देश्य शिमला शहर की भीड़भाड़ को कम करना है। 135 हैक्टेयर में फैली इस परियोजना के विस्तृत प्रोजैक्ट रिपोर्ट के अनुसार इसमें 35 हैक्टेयर सरकारी भूमि शामिल है। योजना में 55.16 हैक्टेयर में रिहायशी ब्लॉक बनाए जाएंगे, जिसमें अमीर, मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए घर होंगे। इसके अलावा 13.36 हैक्टेयर में कमर्शियल जोन, 15.7 हैक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र और लगभग 33 हैक्टेयर में ग्रीन बैल्ट और रिवरफ्रंट विकसित किए जाएंगे। फेज-1 में 895 आवासीय इकाइयां बनाने का लक्ष्य रखा गया है।