Edited By Kuldeep, Updated: 08 Feb, 2026 06:32 PM

प्रदेश में सूचना का अधिकार आरटीआई के तहत सामने आए दस्तावेजों ने एक ऐसे बड़े घोटाले की परतें खोल दी हैं, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डमटाल (सिमरन): प्रदेश में सूचना का अधिकार आरटीआई के तहत सामने आए दस्तावेजों ने एक ऐसे बड़े घोटाले की परतें खोल दी हैं, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई के अनुसार प्रदेश में पिछले कई वर्षों से हजारों करोड़ रुपए के राजस्व का सुनियोजित फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। आरटीआई में सामने आया है कि प्रदेश के विभिन्न विभागों द्वारा बिना किसी वास्तविक खनन सामग्री की आपूर्ति के सैंकड़ों मील दूर से डब्ल्यू और एक्स खनन फार्म खरीदे गए। ये फार्म प्रदेश की खड्डों को लीज पर लेकर मात्र कुछ चुनिंदा ठेकेदारों द्वारा पूरे प्रदेश में बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल विभागीय अधिकारियों की जानकारी और संरक्षण में वर्षों से चलता आ रहा है।
खनन फार्मों में भारी अनियमितताएं
आरटीआई दस्तावेजों से यह भी सामने आया है कि बेचे जा रहे खनन फार्मों में भारी अनियमितताएं हैं। इन्हीं खामियों का फायदा उठाकर खनन माफिया ने पूरे प्रदेश में अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं और रोजाना हजारों करोड़ रुपए के राजस्व की लूट की जा रही है। इस पूरे मामले में खनन विभाग की भूमिका सबसे अधिक संदेह के घेरे में है। आरोप है कि खनन विभाग छोटे कारोबारियों और ट्रैक्टर-ट्रालियों पर तो अपनी धौंस दिखाने से पीछे नहीं हटता। कागजी कार्रवाई और औपचारिकताओं तक सीमित विभागीय कार्रवाई ने खनन माफिया को खुला संरक्षण दिया। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा घोटाला प्रदेश सरकार और प्रशासन की आंखों के सामने लगातार कई वर्षों से चलता आ रहा है।
सरकार को करोड़ों की चपत
पंचायती राज विभाग, लोक निर्माण विभाग व जल शक्ति विभाग और प्रदेश की सरहद पर लगे स्टोन क्रशरों को रोजाना हजारों की तादाद में खनन माफिया 2 हजार से लेकर 8 हजार की कीमत पर खनन फार्म को बेच रहे हैं। रोजाना हजारों की तादाद में फर्जी तरीके से बेचे जा रहे फार्मों से करोड़ों रुपए लूटे जा रहे हैं। करोड़ों के राजस्व की चपत प्रदेश सरकार को लग रही है।
कांग्रेस सरकार का भ्रष्टाचार से पुराना नाता : रीता
इंदौरा की पूर्व विधायक रीता धीमान का कहना है कि कांग्रेस सरकार का भ्रष्टाचार से पुराना नाता रहा है। प्रदेश सरकार में खनन फार्मों से जुड़े करोड़ों रुपए के इस घोटाले ने सरकार और अफसरशाही की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाई जाए। दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और राजनीतिक संरक्षण देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। खनन अधिकारी नूरपुर सुरेश कुमार का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इस विषय पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही बता सकते हैं।