Mandi: महाशिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने लाव-लश्कर के साथ निकले सराज घाटी के देवता, पंडोह में हुआ भव्य स्वागत

Edited By Vijay, Updated: 03 Feb, 2026 06:34 PM

deity markandeya rishi and ghatotkacha

अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए सराज घाटी के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि और देवता घटोत्कच कोटलू अपने पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ रवाना हो चुके हैं।

पंडोह (देशराज): अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में भाग लेने के लिए सराज घाटी के आराध्य देवता मार्कंडेय ऋषि और देवता घटोत्कच कोटलू अपने पारंपरिक लाव-लश्कर के साथ रवाना हो चुके हैं। देव यात्रा के दौरान मंगलवार को देवताओं के पंडोह पहुंचने पर स्थानीय लोगों द्वारा विधिवत, श्रद्धा और उत्साह के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।

27 वर्षों से निभाई जा रही स्वागत की परंपरा
पंडोह में देवताओं के आगमन पर भक्तों का उत्साह देखते ही बनता था। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भक्तों की ओर से देवताओं और उनके साथ चल रहे देवलुओं (लाव-लश्कर) के लिए भोजन की विशेष व्यवस्था की गई। देव परंपरा के अनुसार, यह सेवा पिछले लगभग 27 वर्षों से लगातार पंडोह में निभाई जा रही है, जो श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और देव संस्कृति से उनके जुड़ाव का प्रतीक है।

40 से 45 दिनों की होगी धार्मिक यात्रा
देवता के पुजारी भूमेराम ने जानकारी देते हुए बताया कि देवता मार्कंडेय ऋषि और घटोत्कच कोटलू अपनी-अपनी कोठी से 28 जनवरी को महाशिवरात्रि यात्रा के लिए रवाना हुए हैं। यह धार्मिक यात्रा लगभग 40 से 45 दिनों तक चलेगी। उन्होंने बताया कि इस दौरान देवता रास्ते में पड़ने वाले गांवों में भक्तों के घर-घर जाकर दर्शन देते हैं और क्षेत्र के लोगों के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

15 फरवरी को पहुंचेंगे पड्डल मैदान
पुजारी भूमेराम ने बताया कि देवता 15 फरवरी को महाशिवरात्रि पर्व में विधिवत शामिल होंगे। शिवरात्रि महोत्सव संपन्न होने के बाद देवता पुनः अपनी कोठी की ओर वापसी करेंगे। इस दौरान पूरा क्षेत्र देव ध्वनियों से गूंज उठेगा।

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