Edited By Vijay, Updated: 09 May, 2026 07:14 PM

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य में बार-बार हो रहीं बादल फटने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इनके विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के कड़े निर्देश दिए हैं।
शिमला (ब्यूरो): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य में बार-बार हो रहीं बादल फटने की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इनके विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के कड़े निर्देश दिए हैं। एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब राज्य स्तरीय सभी आपदा अनुसंधान गतिविधियां हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के हिमालयन सैंटर फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड रैजीलिएंस के माध्यम से ही संचालित की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने एचपीयू सैंटर को निर्देश दिए हैं कि वह बादल फटने की घटनाओं का अध्ययन करते समय विभिन्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दे, जिसके तहत जलविद्युत परियोजनाओं और बांधों का स्थानीय पारिस्थितिकी पर असर, जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान का विश्लेषण, हिमालयी क्षेत्र की जटिल बनावट और एरियल-डिस्टैंस (हवाई दूरी) आधारित विश्लेषण, आपदा के स्वरूप को समझकर भविष्य के लिए तकनीकी मूल्यांकन करे।
आपदा प्रबंधन तंत्र को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण वित्तीय घोषणाएं की हैं। इसके तहत क्षमता निर्माण के तहत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए 6 करोड़ रुपए आबंटित, संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए बुनियादी ढांचे और विस्तार के लिए 10 करोड़ रुपए की अतिरिक्त मंजूरी, ग्लेशियल लेक स्टडी के तहत ग्लेशियल लेक आऊटबर्स्ट फ्लड के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए 1 करोड़ रुपए, विशेषज्ञों की भर्ती के तहत तकनीकी और अनुसंधान क्षमता बढ़ाने के लिए विषय विशेषज्ञों और अतिरिक्त पेशेवरों की भर्ती के निर्देश जारी किए हैं। वहीं राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बैठक में कहा कि भूस्खलन और ग्लेशियर संबंधी आपदाओं के अध्ययन के लिए बाहरी एजैंसियों पर निर्भरता कम करना आवश्यक है। राज्य को अपनी तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमता को स्वयं विकसित करना होगा, ताकि डीपीआर तैयार करने और चेतावनी तंत्र विकसित करने में आत्मनिर्भरता आए।
बैठक के दौरान मंडी जिले के थुनाग क्षेत्र के लिए विकसित किए गए हाईड्रोडायनामिक मॉडल की प्रस्तुति दी गई। यह मॉडल फ्लैश फ्लड (अचानक आने वाली बाढ़) के प्रभावों का सटीक आकलन करने और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र विकसित करने में मदद करता है। मुख्यमंत्री ने इस कार्य की सराहना की और इसे राज्य के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी लागू करने पर बल दिया। बैठक में एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह, सैंटर के निदेशक प्रो. एनएस नेगी और उपनिदेशक डॉ. महेश शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह केंद्र पोस्ट डिजास्टर नीड्स असैसमैंट में भी सरकार का प्रमुख सहयोगी बनेगा।
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