Edited By Kuldeep, Updated: 28 Apr, 2026 06:56 PM

एचआरटीसी पैंशनर्ज को अप्रैल माह की 28 तारीख होने के बाद भी मार्च माह की पैंशन नहीं मिली है। ऐसे में एचआरटीसी पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति व संगठन ने सरकार पर वायदाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में...
शिमला (राजेश): एचआरटीसी पैंशनर्ज को अप्रैल माह की 28 तारीख होने के बाद भी मार्च माह की पैंशन नहीं मिली है। ऐसे में एचआरटीसी पैंशनर्ज संयुक्त संघर्ष समिति व संगठन ने सरकार पर वायदाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। संगठन पदाधिकारियों का कहना है कि हर माह समय पर पैंशन न मिलने के कारण बुजुर्ग पैंशनर्ज को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद पैंशन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। पैंशन जारी करने से संबंधित फाइल पिछले दो सप्ताह से मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित है।
समिति राज्य प्रधान देव राज ठाकुर ने कहा कि पैंशनर्ज के प्रतिनिधिमंडल कई बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। संगठन के अध्यक्ष केसी चौहान और महासचिव नानक शांडिल ने कहा कि पैंशनर्ज को हर माह की पहली तारीख को पैंशन मिलनी चाहिए, लेकिन इस बार 28 तारीख गुजरने के बाद भी पैंशन नहीं आई। उन्होंने कहा कि हालात इतने खराब हैं कि पैंशनर्ज अपनी दवाइयों और सामाजिक जिम्मेदारियों तक को निभाने में असमर्थ हो रहे हैं, उन्हें मजबूरी में अपने बच्चों या रिश्तेदारों से आर्थिक मदद लेनी पड़ रही है।
इस माह होना था आंदोलन लेकिन राष्ट्रपति दौरे के चलते टाला
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पैंशनर्ज को समय पर पैंशन न मिलने से पैंशनर्ज में भारी आक्रोश है और इस माह के अंत में रोष रैली निकालने की योजना बनाई जा रही थी, लेकिन शिमला में महामहिम राष्ट्रपति के प्रवास के चलते फिलहाल इसे टाल दिया गया है। उन्होंने कहा कि जनवरी में प्रबंधन के साथ हुई बैठक में 31 मार्च तक मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि मई माह में नोटिस देकर निगम मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधन और सरकार की होगी।