Edited By Kuldeep, Updated: 12 Mar, 2026 10:31 PM

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर का न्यूरोसर्जरी विभाग अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ क्षेत्र में न्यूरोलॉजिकल उपचार की दिशा में नई पहचान बना रहा है।
बिलासपुर (बंशीधर): अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर का न्यूरोसर्जरी विभाग अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के साथ क्षेत्र में न्यूरोलॉजिकल उपचार की दिशा में नई पहचान बना रहा है। हिमाचल प्रदेश में न्यूरो-इंटरवेंशनल उपचार प्रदान करने वाला यह प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां जटिल मस्तिष्क और रीढ़ की बीमारियों का आधुनिक तकनीकों से सफल उपचार किया जा रहा है।
विभाग में एंडोवास्कुलर और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के माध्यम से जटिल रक्त वाहिका संबंधी रोगों का इलाज किया जा रहा है। ब्रेन और स्पाइन एंजियोग्राफी के लिए डिजिटल सब्ट्रैक्शन एंजियोग्राफी जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे बीमारी की सटीक पहचान के साथ उपचार भी संभव हो पाता है।
एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लैफ्टिनैंट जनरल डॉ. दलजीत सिंह के नेतृत्व में विभाग ने वर्ष 2025 के अंत तक 500 से अधिक ब्रेन, स्पाइन और न्यूरो-इंटरवेंशनल प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
न्यूरोसर्जरी विभाग में डॉ. अर्जुन धर, डॉ. भानु प्रताप और डॉ. राहुल जैन मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श दे रहे हैं। विभाग की ओपीडी सेवाएं सोमवार से शनिवार तक उपलब्ध हैं, जबकि गंभीर मामलों के लिए आपातकालीन सेवाएं चौबीसों घंटे जारी रहती हैं।