बिलासपुर एम्स बना हाईटेक: नवजातों को मिला नई तकनीक का 'सुरक्षा कवच', जानें कैसे काम करेगा यह उपकरण

Edited By Jyoti M, Updated: 11 Mar, 2026 11:57 AM

bilaspur aiims goes hi tech newborns get  safety shield  of new technology

हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर ने नन्हें कदम रखने वाले नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों की जीवन रक्षा के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। अस्पताल का नियोनेटोलॉजी विभाग जल्द ही ऐसे 'स्मार्ट' उपकरणों से लैस होने जा रहा है, जो न केवल...

हिमाचल डेस्क। हिमाचल प्रदेश के एम्स बिलासपुर ने नन्हें कदम रखने वाले नवजात शिशुओं, विशेषकर समय से पूर्व जन्म लेने वाले बच्चों की जीवन रक्षा के लिए एक नई उम्मीद जगाई है। अस्पताल का नियोनेटोलॉजी विभाग जल्द ही ऐसे 'स्मार्ट' उपकरणों से लैस होने जा रहा है, जो न केवल उपचार की सटीकता बढ़ाएंगे बल्कि शिशुओं को होने वाले कष्ट को भी न्यूनतम कर देंगे।

फाइबर ऑप्टिक ट्रांस इल्यूमिनेटर

नवजात शिशुओं, विशेषकर कमजोर बच्चों की नसें (veins) इतनी सूक्ष्म होती हैं कि सामान्य आंखों से उन्हें ढूंढना और उनमें ड्रिप या इंजेक्शन लगाना डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। अब 'फाइबर ऑप्टिक ट्रांस इल्यूमिनेटर' इस समस्या को हल करेगा।

यह उपकरण एक विशेष ठंडी एलईडी लाइट का उपयोग करता है। जब इसे त्वचा के पास लाया जाता है, तो शरीर के भीतर की नसें साफ दिखाई देने लगती हैं। इससे बार-बार सुई चुभाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे मासूमों को अनावश्यक दर्द से मुक्ति मिलेगी और इलाज की प्रक्रिया तेज होगी। कम वजन वाले बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा 'हाइपोथर्मिया' (शरीर का तापमान गिरना) होता है। एम्बुलेंस में या एक वार्ड से दूसरे वार्ड में ले जाते समय तापमान बनाए रखना कठिन होता है।

विभाग में अब 'एक्सोथर्मिक एम्ब्रेस' पोर्टेबल वार्मर की सुविधा होगी। इसमें उन्नत 'पीसीएम जेल पैक' तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो बिना किसी बाहरी बिजली स्रोत के घंटों तक शिशु के शरीर को स्थिर 37 डिग्री सेल्सियस के आदर्श तापमान पर गर्म रख सकता है। यह विशेष रूप से एम्बुलेंस में शिफ्टिंग के दौरान एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा, जिससे ठंड के कारण होने वाली जटिलताओं का खतरा खत्म हो जाएगा।

क्यों खास है यह कदम?

अक्सर पहाड़ी क्षेत्रों में समय से पहले जन्मे बच्चों को उचित तापमान और सटीक इलाज न मिल पाने के कारण जोखिम बढ़ जाता है। एम्स बिलासपुर की यह नई पहल आधुनिक इंजीनियरिंग और चिकित्सा विज्ञान का ऐसा मेल है, जो छोटे बच्चों की उत्तरजीविता (survival rate) में क्रांतिकारी सुधार लाएगा।

विशेषज्ञों का मत:

प्रीमैच्योर बच्चों के लिए शुरुआती कुछ घंटे और सही तापमान जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय करते हैं। ये नए उपकरण इसी अंतर को पाटने का काम करेंगे।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!