Edited By Jyoti M, Updated: 01 Jan, 2026 11:51 AM

पहाड़ों की ताजी हवा का सपना अब बद्दी के औद्योगिक गलियारों में दम तोड़ रहा है। साल 2025 के विदा होते-होते इस औद्योगिक क्षेत्र की फिजां इतनी जहरीली हो गई कि इसने देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में अपनी जगह बना ली। स्थिति यह है कि यहाँ के बाशिंदों...
हिमाचल डेस्क। पहाड़ों की ताजी हवा का सपना अब बद्दी के औद्योगिक गलियारों में दम तोड़ रहा है। साल 2025 के विदा होते-होते इस औद्योगिक क्षेत्र की फिजां इतनी जहरीली हो गई कि इसने देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में अपनी जगह बना ली। स्थिति यह है कि यहाँ के बाशिंदों के लिए सांस लेना किसी चुनौती से कम नहीं रहा।
दिसंबर का 'काला' रिपोर्ट कार्ड
बीते महीने बद्दी की आबोहवा ने स्वास्थ्य के तमाम मानकों को दरकिनार कर दिया। आंकड़ों पर नजर डालें तो महीने के 31 दिनों में से 16 दिन हवा 'बेहद खराब' (Very Poor) श्रेणी में दर्ज की गई। 11 दिन स्थिति 'खराब' रही और महज 3 दिन ही वायु गुणवत्ता 'सामान्य' स्तर पर टिक सकी।
बुधवार के आंकड़े चौंकाने वाले थे, जब बद्दी का एक्यूआई (AQI) 324 तक जा पहुँचा। इसके साथ ही यह शहर देश के उन 12 सबसे प्रदूषित स्थानों में शुमार हो गया, जहाँ की हवा सेहत के लिए खतरनाक मानी जाती है।
प्रमुख शहरों से तुलना (बुधवार का प्रदूषण स्तर):
नोएडा व ग्रेटर नोएडा: 398 और 388 (गंभीर स्थिति)
दिल्ली: 382
बद्दी व कटक: 324
मेरठ: 321
पंचकूला: 303
प्रदूषण के 'विलेन': आखिर क्यों बिगड़े हालात?
पर्यावरण के क्षेत्र में सक्रिय संस्था 'हिम परिवेश' के अनुसार, इस संकट के पीछे केवल मौसम ही नहीं, बल्कि मानवीय कारण भी जिम्मेदार हैं। संस्था के प्रमुख लक्ष्मी चंद ठाकुर ने इस भयावह स्थिति के लिए कुछ मुख्य बिंदुओं को चिन्हित किया है:
अवैध खनन का साया: बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) क्षेत्र में बेखौफ जारी अवैध खनन हवा में धूल के कणों को बढ़ा रहा है।
जर्जर सड़कें और ट्रैफिक: सड़कों की खस्ताहाली के कारण वाहनों के गुजरते ही धूल का गुबार उठता है, जो भारी ट्रैफिक की वजह से कभी थमता नहीं।
औद्योगिक उत्सर्जन: कारखानों से निकलने वाला धुआं और रसायनों ने आसमान में एक काली चादर तान दी है।
बारिश का अभाव: लंबे समय से शुष्क मौसम और धुंध के कारण प्रदूषक तत्व जमीन की सतह के करीब जम गए हैं, जिससे अस्थमा और सांस के रोगियों के लिए जोखिम बढ़ गया है।
हिमाचल के भीतर ही दो अलग तस्वीरें
जहाँ औद्योगिक क्षेत्रों में सांसों का संकट है, वहीं पर्यटन नगरी शिमला (35 AQI) और मनाली (43 AQI) अपनी शुद्ध हवा के कारण राहत का केंद्र बने हुए हैं। धर्मशाला, सुंदरनगर और ऊना जैसे शहरों में भी वायु गुणवत्ता 'संतोषजनक' रही।
हालांकि, औद्योगिक पट्टी के अन्य क्षेत्र जैसे कालाअंब (186), पांवटा साहिब (188) और नालागढ़ (118) में स्थिति 'मध्यम' श्रेणी में बनी हुई है, जो चेतावनी दे रही है कि यदि कड़े कदम नहीं उठाए गए तो यहाँ भी हालात बद्दी जैसे हो सकते हैं।