Edited By Vijay, Updated: 07 Feb, 2026 02:20 PM
प्रदेश भाजपा नेता कर्ण नंदा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए गए आम बजट 2026 को ऐतिहासिक और दूरदर्शी करार दिया है।
शिमला: प्रदेश भाजपा नेता कर्ण नंदा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए गए आम बजट 2026 को ऐतिहासिक और दूरदर्शी करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल एक राजकोषीय दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की विकास दृष्टि का रणनीतिक खाका है जो देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
बजट संरचना में एक दशक का ऐतिहासिक परिवर्तन
भाजपा नेता कर्ण नंदा ने बजट का विस्तृत विश्लेषण करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत की बजट संरचना में जो व्यापक परिवर्तन आया है, वह मोदी सरकार की परिवर्तनशील आर्थिक सोच का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अब सरकार का फोकस अल्पकालिक राहत से आगे बढ़कर दीर्घकालिक क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। उन्हाेंने बजट 2013-14 और बजट 2026-27 की तुलना करते हुए कहा कि यूपीए सरकार के समय का बजट मुख्यतः सबसिडी और राजस्व व्यय पर आधारित था, जबकि मोदी सरकार का वर्तमान बजट पूंजीगत व्यय, उत्पादक परिसंपत्तियों और आर्थिक गति को स्थायी आधार देने वाले निवेश पर केंद्रित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूंजीगत व्यय में पांच गुना से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि केवल सरकारी खर्च नहीं बल्कि भविष्य की आर्थिक क्षमता में दीर्घकालिक निवेश है जो आने वाले दशकों में देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करेगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश से बदलेगी देश की तस्वीर
कर्ण नंदा ने कहा कि पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक बढ़ाैतरी बजट 2026 की सबसे महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय विशेषता है। उन्होंने समझाया कि जब सरकार सड़क, रेल, बंदरगाह, डिजिटल नैटवर्क, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर निवेश करती है तो उसका गुणक प्रभाव अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर पड़ता है। भाजपा नेता ने बताया कि इस निवेश से व्यापक पैमाने पर रोजगार का सृजन होता है, निजी क्षेत्र का निवेश आकर्षित होता है और समग्र उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि वर्तमान बजट संरचना में अवसंरचना को केंद्रीय स्थान प्रदान किया गया है। नंदा ने बजट में शामिल प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक विस्तार, आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स का विकास, रेलवे का आधुनिकीकरण और शहरी अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण मिलकर भारत को एक एकीकृत आर्थिक बाजार में परिवर्तित कर रहे हैं। बजट 2026 इस दिशा को और अधिक गति प्रदान करता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
कर्ण नंदा ने कहा कि रक्षा बजट में की गई उल्लेखनीय वृद्धि केवल सुरक्षा व्यय नहीं है, बल्कि यह भारत की औद्योगिक और तकनीकी नीति का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र को केवल सुरक्षा के नजरिए से नहीं, बल्कि आर्थिक शक्ति के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर विशेष जोर दिया गया है। निजी क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों की भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। निर्यात उन्मुख रक्षा निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे भारत वैश्विक रक्षा बाजार में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके। ये सभी संकेत स्पष्ट करते हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र को भी आर्थिक शक्ति के रूप में विकसित करना चाहता है। रक्षा अनुसंधान और निर्माण में किए गए निवेश का सीधा संबंध उच्च कौशल रोजगार के सृजन और तकनीकी नवाचार से है जो देश की समग्र प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को बढ़ाता है।
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
कृषि क्षेत्र में बजट के प्रावधानों पर बोलते हुए कर्ण नंदा ने कहा कि मोदी सरकार का दृष्टिकोण व्यापक रूप से विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि अब सरकार का फोकस केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तक सीमित नहीं रहा है। इसके बजाय, कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। बजट में कृषि वैल्यू चेन के विकास, आधुनिक भंडारण सुविधाओं, कृषि प्रोसेसिंग उद्योग, कृषि स्टार्टअप को प्रोत्साहन, ड्रोन तकनीक का उपयोग, सिंचाई दक्षता में सुधार और फसल विविधीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। नंदा ने कहा कि प्रत्यक्ष आय सहायता योजनाओं जैसे पीएम किसान सम्मान निधि ने किसानों की आय स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बागवानी और संबद्ध क्षेत्रों की बढ़ती हिस्सेदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मौसमी जोखिमों से सुरक्षित बनाने में सहायक है। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के खुलेंगे नए द्वार
युवाओं के भविष्य पर बोलते हुए कर्ण नंदा ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी संपत्ति है और बजट 2026 इस जनसांख्यिकीय लाभांश को आर्थिक लाभांश में परिवर्तित करने का व्यापक प्रयास करता है। भाजपा नेता ने बताया कि शिक्षा आबंटन में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ कौशल विकास कार्यक्रमों, उद्योग-संलग्न प्रशिक्षण, डिजिटल शिक्षा प्लेटफॉर्म और रिसर्च समर्थन पर विशेष जोर दिया गया है। उन्हाेंने कहा कि आज भारत के सामने चुनौती केवल शिक्षित युवाओं की नहीं, बल्कि रोजगारयोग्य युवाओं की है। उन्होंने बताया कि बजट में शिक्षा से कौशल, कौशल से रोजगार और रोजगार से उद्यमिता तक की संपूर्ण नीति श्रृंखला स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। स्टार्टअप इकोसिस्टम, नवाचार को प्रोत्साहन और एमएसएमई क्षेत्र का सशक्तिकरण इसी व्यापक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र: संरचना, कवरेज और पहुंच का विस्तार
स्वास्थ्य क्षेत्र में बजट के प्रावधानों की चर्चा करते हुए कर्ण नंदा ने कहा कि स्वास्थ्य बजट में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना ने देश के करोड़ों परिवारों को स्वास्थ्य संबंधी वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है जिससे गरीब परिवारों को महंगे इलाज के कारण कर्ज के बोझ से मुक्ति मिली है। एम्स और मेडिकल कॉलेजों का व्यापक विस्तार देश के स्वास्थ्य ढांचे को विकेंद्रीकृत कर रहा है। डिजिटल हेल्थ मिशन, टेलीमेडिसिन सेवाएं और ड्रोन आधारित स्वास्थ्य सेवाएं स्वास्थ्य सेवा वितरण को नई और अभिनव दिशा प्रदान कर रही हैं। नंदा ने बताया कि एम्स की संख्या में तीन गुना से अधिक की वृद्धि केवल संस्थानों की संख्या में बढ़ाैतरी नहीं है, बल्कि यह चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता और क्षेत्रीय संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में भी उच्च गुणवत्ता की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं, नवाचार का बन रहा निर्माता
डिजिटल इंडिया की उपलब्धियों पर कर्ण नंदा ने कहा कि डिजिटल इंडिया अब केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शासन और अर्थव्यवस्था की बुनियादी संरचना बन चुका है। उन्होंने बताया कि यूनिफाइड पेमैंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने भारत की भुगतान प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया है और आज भारत डिजिटल भुगतान में विश्व में अग्रणी देशों में शामिल है। भाजपा नेता ने कहा कि विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्मों ने शासन में पारदर्शिता, सेवा वितरण में दक्षता और वित्तीय समावेशन को व्यापक रूप से बढ़ाया है। भारत वैश्विक नवाचार सूचकांक में निरंतर ऊपर की ओर बढ़ रहा है। पेटैंट और ट्रेडमार्क फाइलिंग में हुई उल्लेखनीय वृद्धि देश में नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का स्पष्ट संकेत है। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि नवाचार का निर्माता भी बन रहा है।
निर्यात और वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार
भारत की वैश्विक स्थिति पर कर्ण नंदा ने कहा कि भारत का कुल निर्यात पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ा है जो देश की उत्पादन क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से सेवाओं और डिजिटल निर्यात में असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है। भाजपा नेता ने कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की भूमिका निरंतर मजबूत हो रही है। चीन पर निर्भरता कम करने की वैश्विक प्रवृत्ति ने भारत के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। उन्हाेंने जाेर देकर कहा कि मेक इन इंडिया"अभियान और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं इस आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला हैं। इन पहलों ने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हिमाचल के लिए बजट 2026 का विशेष महत्व
हिमाचल प्रदेश के लिए बजट के प्रावधानों पर विशेष खुशी व्यक्त करते हुए कर्ण नंदा ने कहा कि पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और लागत संबंधी विशेष चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने हिमाचल प्रदेश को विशेष सहायता ढांचे में रखा है। उन्होंने बताया कि राज्य के लिए कर हस्तांतरण और अनुदान सहायता में उल्लेखनीय प्रावधान किया गया है। पूंजीगत व्यय के लिए ब्याज-मुक्त दीर्घकालिक ऋण योजना के तहत राज्य को हजारों करोड़ रुपए की विशेष सहायता प्रदान की गई है। उन्होंने बताया कि यह सहायता सामान्य वित्त आयोग ढांचे से अतिरिक्त है जो राज्य की विकास परियोजनाओं को गति प्रदान करेगी।
कनैक्टिविटी बनी हिमाचल के विकास की रीढ़, टनल और हाईवे का बिछा जाल
हिमाचल में कनैक्टिविटी परियोजनाओं काे लेकर कर्ण नंदा ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों का व्यापक विस्तार, महत्वाकांक्षी सुरंग परियोजनाएं और रणनीतिक सड़कें तेजी से निर्मित हुई हैं। उन्होंने बताया कि अटल सुरंग ने क्षेत्रीय संपर्क और पर्यटन दोनों को नई दिशा प्रदान की है जिससे लाहौल-स्पीति जैसे दूरस्थ क्षेत्र वर्षभर देश के अन्य हिस्सों से जुड़े रहते हैं। भारतमाला परियोजना के तहत राज्य में नए राजमार्ग कॉरिडोर स्वीकृत हुए हैं जो राज्य की आर्थिक संभावनाओं को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। उड़ान योजना के तहत हिमाचल में हवाई संपर्क में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। नए एयरपोर्ट और हैलीपोर्ट चालू हुए हैं तथा नए हवाई मार्ग प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से मंडी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को मिली स्वीकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भविष्य की बड़ी संभावना है जो मध्य हिमाचल को सीधे हवाई संपर्क प्रदान करेगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा अवसंरचना का विस्तार
कर्ण नंदा ने कहा कि एम्स बिलासपुर की स्थापना हिमाचल प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। इसके साथ ही ईएसआईसी अस्पताल और नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से राज्य का स्वास्थ्य ढांचा सुदृढ़ हुआ है। इन संस्थानों से राज्य को सुपर स्पैशियलिटी स्वास्थ्य सेवाएं और उच्च गुणवत्ता की मेडिकल शिक्षा दोनों का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेशवासियों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली या चंडीगढ़ जाने की आवश्यकता नहीं रही। ड्रोन आधारित स्वास्थ्य आपूर्ति जैसी अभिनव पहलें पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। इससे दुर्गम क्षेत्रों में भी आपातकालीन दवाइयां और रक्त की आपूर्ति समय पर संभव हो रही है।
गांवों में पहुंचेगा विकास, पर्यटन को मिलेगी रफ्तार
ग्रामीण विकास और पर्यटन पर कर्ण नंदा ने कहा कि पर्यटन सर्किट विकास योजनाओं के तहत हिमाचल के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकास के लिए स्वीकृति मिली है। उन्होंने बताया कि इससे राज्य की पर्यटन अवसंरचना में व्यापक सुधार हो रहा है और पर्यटन से होने वाली आय में वृद्धि हो रही है। जल जीवन मिशन के तहत राज्य के प्रत्येक घर तक पाइप से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से हो रहा है। ग्रामीण आवास योजनाओं और ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों के बड़े राष्ट्रीय आबंटन का लाभ भी राज्य को मिल रहा है। इन योजनाओं से ग्रामीण जीवन स्तर और बुनियादी सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार संभव हुआ है। गांवों से पलायन की समस्या पर नियंत्रण और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है।
विकसित भारत की ओर निर्णायक कदम
भाजपा नेता कर्ण नंदा ने कहा कि आम बजट 2026 स्पष्ट रूप से निवेश-आधारित, युवा-केंद्रित और अवसंरचना-प्रधान विकास मॉडल को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक राष्ट्रीय क्षमता निर्माण पर आधारित है। राष्ट्रीय स्तर पर यह बजट विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों के लिए यह बजट विशेष अवसरों का विस्तार करता है। उन्हाेंने कहा कि विकास की इस व्यापक रूपरेखा का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब केंद्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय, पारदर्शिता और कुशल क्रियान्वयन सुनिश्चित हो। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दिशा निर्धारित कर दी है। अब गति और परिणाम प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जन भागीदारी पर निर्भर करेंगे।