BJP ने राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति का किया बचाव, केंद्र पर दोष मढ़ने के लिए कांग्रेस की आलोचना की

Edited By Swati Sharma, Updated: 15 Feb, 2026 10:55 AM

bjp defends abolition of revenue deficit grant

Shimla News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य इकाई ने शनिवार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) में चरणबद्ध कटौती के केंद्र सरकार के निर्णय का बचाव किया। भाजपा ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के दौरान हुई कथित वित्तीय अनुशासनहीनता के...

Shimla News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य इकाई ने शनिवार को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) में चरणबद्ध कटौती के केंद्र सरकार के निर्णय का बचाव किया। भाजपा ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के दौरान हुई कथित वित्तीय अनुशासनहीनता के लिए केंद्र को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

BJP ने सरकार पर 'खर्चीली नीतियों' में शामिल होने का लगाया आरोप

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्य सरकार पर 'खर्चीली नीतियों' में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी भारत सरकार पर डालने की कोशिश कर रही है। डॉ. बिंदल ने बैठक की गंभीरता पर सवाल उठाते हुए प्रमुख कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों की अनुपस्थिति की ओर इशारा किया। ये टिप्पणियां तब आईं जब भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की बुलाई सर्वदलीय बैठक से बहिर्गमन (वॉकआउट) कर दिया। उन्होंने तकर् दिया कि राज्य के सामने असली समस्या धन की कमी नहीं, बल्कि संसाधनों के अकुशल उपयोग की है। डॉ. बिंदल ने आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि केंद्रीय करों में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.830 प्रतिशत से बढ़कर 0.914 प्रतिशत हो गई है। इसके परिणामस्वरूप 2026 में राज्य को लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 2,450 करोड़ रुपये अधिक है।

'राजकोषीय तनाव बढ़ा है और जनता पर बोझ पड़ा'

राजीव बिंदल ने आगे कहा कि राज्य को ग्रामीण और शहरी विकास अनुदान के रूप में 4,179 करोड़ रुपये और आपदा प्रबंधन के मद में 2,682 करोड़ रुपये भी प्राप्त होने वाले हैं। वित्त आयोगों के आवंटन की तुलना करते हुए उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान केंद्रीय सहायता कई गुना बढ़ गई है। राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) पर डॉ. बिंदल ने कहा कि 2004-14 के बीच हिमाचल को लगभग 18,091 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि 2015-25 के दौरान यह राशि बढ़कर लगभग 89,254 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी धनराशि प्राप्त होने के बावजूद कांग्रेस सरकार खर्च का समझदारी से प्रबंधन करने में विफल रही है, जिससे राजकोषीय तनाव बढ़ा है और जनता पर बोझ पड़ा है।

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