Edited By Vijay, Updated: 13 Feb, 2026 06:36 PM

विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल सैक्शन पर उत्तर रेलवे ने स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक सिस्टम से लैस नैरोगेज कोचों के पहले रेक को शामिल कर दिया है। शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इसे एयर ब्रेक कोच सेवा में शामिल किया गया।
शिमला (अभिषेक): विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल सैक्शन पर उत्तर रेलवे ने स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक सिस्टम से लैस नैरोगेज कोचों के पहले रेक को शामिल कर दिया है। शुक्रवार को आधिकारिक तौर पर इसे एयर ब्रेक कोच सेवा में शामिल किया गया। उत्तर रेलवे ने इसे शामिल कर आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए यह ऐतिहासिक पहल की है। उन्नत तकनीक वाले इस रेक ने शुक्रवार को ट्रेन संख्या 52453 कालका-शिमला एक्सप्रैस के रूप में अपनी पहली यात्रा शुरू की।
7 कोचों (14 यूनिट) और लोको नंबर 714 जैडडीएम 3डी के साथ यह ट्रेन अपने निर्धारित समय पर सुबह 6.20 बजे कालका रेलवे स्टेशन से रवाना हुई। पारंपरिक ब्रेकिंग सिस्टम से आधुनिक एयर ब्रेक सिस्टम की ओर यह बदलाव कालका वर्कशॉप के लिए एक तकनीकी उपलब्धि है, जहां यह बदलाव कार्य पूरा किया गया। रेलवे अधिकारियों के अनुसार संपूर्ण रूपांतरण कार्य स्थानीय स्तर पर किया गया, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नई प्रणाली के तहत कोचों की बोगियों व ट्रॉलियों को संशोधित कर कड़े सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया है।
हिमालयी क्षेत्र की तीखी ढलानों और घुमावदार पटरियों को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यात्री सेवा में शामिल किए जाने से पहले कोचों का विस्तृत परीक्षण किया गया। अनुसंधान डिजाइन व मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा ऑसिलेशन ट्रायल, एमरजैंसी ब्रेकिंग डिस्टैंस (ईबीडी) व नियंत्रण परीक्षण किए गए। उसके उपरांत रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा वैधानिक सत्यापन किया गया। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक ने यात्री सेवा के लिए अंतिम स्वीकृति प्रदान की। उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि एयर ब्रेक कोचों की शुरूआत कालका-शिमला रेललाइन की विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ यात्रियों को आधुनिक सुरक्षा मानकों और लागत प्रभावी तकनीकी प्रगति का लाभ सुनिश्चित करने की हमारी दोहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।