Shimla: विधानसभा में प्राकृतिक आपदा के मुद्दे पर गरमाया माहौल, पक्ष-विपक्ष में तीखी नोक-झोंक

Edited By Vijay, Updated: 28 Aug, 2025 11:54 PM

atmosphere in the assembly heated up on the issue of natural disaster

हिमाचल प्रदेश में मानसून की वर्षा के कारण आई प्राकृतिक आपदा के मुद्दे पर विधानसभा का माहौल खूब गरमाया। इसको लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जिस कारण सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।

शिमला (कुलदीप): हिमाचल प्रदेश में मानसून की वर्षा के कारण आई प्राकृतिक आपदा के मुद्दे पर विधानसभा का माहौल खूब गरमाया। इसको लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जिस कारण सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री हर्षवर्धन चौहान की तरफ से सदन में प्रस्ताव भी लाया गया, जिसमें केंद्र सरकार से हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने और विशेष राहत पैकेज उपलब्ध करवाने की मांग की गई। इस प्रस्ताव को सदन से सर्वसम्मति से पारित किया गया। हालांकि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के उत्तर देने के विरोध में विपक्ष नारेबाजी करता रहा। इसी मुद्दे को लेकर सदन की कार्यवाही को 15 मिनट के लिए स्थगित भी करना पड़ा, जिसके चलते प्रश्नकाल बाधित हुआ और सिर्फ 1 ही प्रश्न लग पाया। प्राकृतिक आपदा पर चर्चा के कारण शून्यकाल को भी स्थगित करना पड़ा। इस बीच सदन में विपक्ष की तरफ से मानसून सत्र को स्थगित करने की मांग भी उठी।

लोकतंत्र का गला घोंट रहा विपक्ष : जगत 
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने प्राकृतिक आपदा को लाए गए प्रस्ताव का उत्तर देते हुए विपक्ष के उनके प्रति जताए जाने वाले विरोध को लोकतंत्र का गला घोंटने जैसे बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी बात कहता है, लेकिन सरकार का पक्ष नहीं सुनना चाहता। प्रदेश में जगह-जगह बादल फटने और सड़कों के अवरुद्ध होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, पर विपक्ष सिर्फ लोगों को गुमराह करना चाहता है। इससे पहले वर्ष, 2023 में भी सदन में लाए गए प्रस्ताव का भाजपा ने समर्थन नहीं किया था। उन्होंने कहा कि भरमौर में साढ़े 3 हजार लोग सुरक्षित हैं तथा उन्हें स्कूलों एवं अन्य सुरक्षित स्थानों पर शरण दी गई है। सबको खाना और पानी मिल रहा है तथा 38 लोगों को चंबा में शिफ्ट किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश से केंद्र सरकार भेदभाव करती है। उन्होंने कह कि यह प्रस्ताव जरुरी है, ताकि देश के लोगों को पता चले कि हिमाचल प्रदेश मुसीबत में है। 

प्राकृतिक आपदा पर पक्ष-विपक्ष संवेदनशील : पठानिया
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि चम्बा और प्रदेश के अन्य जिलों में आई प्राकृतिक आपदा पर पक्ष और विपक्ष संवेदनशील है। विधानसभा सत्र के दौरान कोई भी सदस्य अपने विधानसभा क्षेत्र जाने को स्वतंत्र है। फिर भी विपक्ष और सरकार दोनों की आपसी सहमति से सत्र स्थगित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 72 घंटों में भारी नुक्सान हुआ है। 

सरकार की छवि को गलत प्रस्तुत कर रहा विपक्ष : उपमुख्यमंत्री
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि सरकार जहां आपदा प्रबंधन में जुटी है, वहीं विपक्ष राजनीति कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की तरफ से सरकार की छवि को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है कि सरकारी स्तर पर कुछ नहीं किया जा रहा है। राज्य के मुख्य सचिव सभी जिलाधिकारियों के संपर्क में हैं और हालात की बराबर निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि रात 1 बजे पठानकोट-चंबा सड़क खोल दी गई और मणिमहेश यात्रा में फंसे यात्रियों काे रैस्क्यू किया गया है।

मुख्यमंत्री का गैर-जरूरी काम से बाहर जाना गलत : जयराम
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन में कहा कि प्राकृतिक आपदा के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का दिल्ली के बाद गैर जरूरी काम से बिहार पहुंचना गलत है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस समय प्रदेश में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लेना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मणिमहेश यात्रा के कई श्रद्धालु रास्ते में फंसे हैं। इसी तरह पंडोह-मनाली मार्ग के अवरुद्ध होने से हजारों पर्यटक फंसे हैं। उन्होंने कहा कि चंबा और लाहौल-स्पीति में भोजन की व्यवस्था करने में परेशानी आ रही है।

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